WTO में भारतीय रुख की सराहना

Friday, November 14, 2014

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विश्व व्यापार संगठन

नई दिल्ली | एजेंसी: विश्व व्यापार संगठन में भारत के रुख की सभी देशों ने सराहना की है. सबसे बड़ी बात यह है कि अमरीका ने भी भारत के रुख की सराहना की है. वैश्विक सीमा-शुल्क नियमों में ढील से संबंधित विश्व व्यापार संगठन के समझौते पर जारी गतिरोध की समाप्ति की घोषणा करते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि खाद्य पदार्थो के संग्रहण के मसले पर अमेरिका के साथ एक समझौता हुआ है. निर्मला ने कहा कि इस समझौते से ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट पर सहमति का मार्ग खुलेगा.

भारत ने खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य के सरकारी भंडारण के मसले के स्थायी समाधान की मांग की है न कि चार साल की सीमित अवधि के लिए, जैसा कि गत वर्ष इंडोनेशिया के बाली में डब्ल्यूटीओ मंत्रीस्तरीय सम्मेलन में शुरू में फैसला किया गया था.

निर्मला ने यहां संवाददाताओं से कहा, “अमरीका के साथ वहां इस बात पर मतभेद था कि बाली समझौते में खामी थी, जिसे दूर किया जाना था. हम समझौते की त्रुटि को दूर किए जाने की मांग कर रहे थे.”

उन्होंने का, “हम रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं.”

मंत्री ने कहा कि कई देशों ने डब्ल्यूटीओ में भारत के रुख को सही माना है और अमरीका ने भी इसे सही कहा है और अब सरकारी संग्रहण पर उसने खुलकर हमारा समर्थन किया है. भारत ने व्यापार की सुविधा में कभी अड़चन पैदा नहीं की है. हम सिर्फ अपने किसानों के हित की रक्षा करना चाहते थे.

अमरीका सहित कई देश ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट पर अपनी आपत्ति वापस लेने के लिए भारत पर दबाव बनाए हुए हैं.

भारत की आपत्ति कुल उत्पादित अनाज मूल्य के 10 फीसदी सब्सिडी की डब्ल्यूटीओ की सीमा और अनाजों के संग्रहण पर है. भारत ने पिछले वर्ष खाद्य सुरक्षा अधिनियम पारित किया है, जिसमें 70 फीसदी आबादी को सब्सिडी दर पर अनाज देने की गारंटी दी गई है. इस कानून का पालन करने से भारत को डब्ल्यूटीओ की सीमा तोड़नी पड़ सकती है, जिससे देश पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

बाली में मंत्रिगण शांति अनुच्छेद पर भी सहमत हुए थे. इस अनुच्छे के तहत यदि कोई देश डब्ल्यूटीओ की सब्सिडी सीमा का उल्लंघन करता है, तो 2017 तक उसके खिलाफ डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटारा इकाई में शिकायत नहीं की जा सकती है.

निर्मला ने यहां रविवार को कहा था, “कृपया शांति अनुच्छे को आगे बढ़ाएं और हमें स्थायी समाधान दें. यह सर्वथा उचित मांग है.”

निर्मला ने गुरुवार को एक बयान में कहा, “डब्ल्यूटीओ विकासशील देशों और खासकर निर्धनतम और उपेक्षित देशों के लिए सर्वाधिक हितकर है और हम इस संगठन को मजबूत करने के लिए कृतसंकल्प हैं.”

उन्होंने कहा, “अमरीका के साथ हुए इस समझौते से डब्ल्यूटीओ में गतिरोध दूर होगा और ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट के कार्यान्वयन का मार्ग खुलेगा.”

निर्मला ने भारतीय प्रस्ताव को सार्वजनिक न करते हुए डब्ल्यूटीओ के सदस्यों से अनुरोध किया कि वे इस पर डब्ल्यूटीओ के महापरिषद में चर्चा करें.

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