भारत कुपोषण के मामले में अव्वल

Monday, July 1, 2013

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छत्तीसगढ़ कुपोषण

नई दिल्ली: जीडीपी और आर्थिक विकास दर जैसे आंकड़ों को धता बताती हुई एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में खुलासा हुआ है दुनिया की 40 फीसदी कुपोषित आबादी भारतीय है. कनाडा स्थित गैरसरकारी संगठन माइक्रोन्यूट्रीएंट इनिशिएटिव के द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि कुपोषण के अलावा कम वजन वाले बच्चों की संख्या भी भारत में सबसे अधिक है.

इस रिपोर्ट के बारे में बताते हुए संस्था के अध्यक्ष एम जी वेंकटेश मन्नार ने बताया कि उभरती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद स्वास्थ्य और पोषण के मामले में भारत की हालत ब्राजील, नेपाल, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों से खराब है. श्री मन्नार कहते हैं कि भारत में बच्चों में बाधित विकास, कम वजन और रक्त की कमी दुनिया में सर्वाधिक है जो कि एक दुखद स्थिति है.

इसके कारण बताते हुए श्री मन्नार कहते हैं कि भारत में इन समस्याओं से निपटने के लिए सभी जरूरी कार्यक्रम और नीतियां मौजूद हैं, लेकिन इन्हें सही तरह से लागू नहीं किया जा रहा है. उनके अनुसार देश में स्वास्थ्य, महिला और बाल विकास, शिक्षा तथा ग्रामीण विकास जैसे कई मंत्रालय हैं जिनके पास इसका काम बंटा हुआ है.

ऐसे में होता यह है कि योजनाओं को लागू कराने में किसी भी विभाग की सीधी जिम्मेदारी नहीं बन पाती है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेली की कमी भी योजनाओं का उचित क्रियान्वन नहीं होने देती है. उन्होंने 2005 के बाद से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण न होने पर भी आश्चर्य जताया है.

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