भारत इतना गरीब क्यों?

Thursday, July 17, 2014

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गरीबी

नई दिल्ली | संवाददाता: टाटा-अंबानी के देश भारत में दुनिया के एक तिहाई गरीब रहते हैं. इस बात का खुलासा संयुक्त राष्ट्र संघ के एक रिपोर्ट से हुआ है. गौरतलब है कि विश्व के रईसों के सूची में भारत के कई उद्योगपतियों का नाम शामिल है इसके बावजूद देश में गरीबी व्याप्त है. इससे साफ है कि भारत में आय की वितरण सही तरीके से नहीं होता है तथा ज्यादातर संपदा मुठ्ठी भर लोगों के हाथ में केन्द्रित हो गई है.

बुधवार को यहां जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के समस्त निर्धनतम लोगों का 32.9 फीसदी हिस्सा भारत में रहता है. यह अनुपात चीन, नाइजीरिया और बांग्लादेश के अनुपात से भी ज्यादा है. देश की आबादी 121 करोड़ है जिसका अर्थ है कि भारत में 40 करोड़ गरीब लोग रहते हैं.

बाल मृत्यु दर भी भारत में सर्वाधिक है. यहां 2012 में 14 लाख बच्चों की मौत पांच वर्ष की अवस्था से पहले हो गई. इसी वर्ष दुनिया भर में 66 लाख बच्चों की मौत पांच साल की अवस्था से पहले हो गई, जिसमें दक्षिण एशिया की हिस्सेदारी 21 लाख है.

सन 2000 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित सहस्त्राब्दि सम्मेलन में दुनिया भर के देशों ने 2015 तक के लिए गरीबी, भूख, लैंगिक समानता, शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दों से संबंधित आठ लक्ष्य तय किए थे. जाहिर है कि जिस देश की एक तिहाई जनता घोषित रूप से गरीब हो वहां इस लक्ष्य तक पहुंचना आसान काम नहीं है. मोदी सरकार के लिये यह गरीबी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में प्रकट हो गई है.

रिपोर्ट जारी करते हुए अल्पसंख्यक मामलों की केंद्रीय मंत्री नजमा हेप्तुल्ला ने कहा कि मानव विकास राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का मार्गदर्शक सिद्धांत है और वह समावेशी तरीके से सभी का विकास करना चाहती है. गौरतलब है कि मनमोहन-मोंटेक की जोड़ी ने भी देश में समावेशी विकास की बत की थी परन्तु वास्तविकता उससे कोसों दूर है.

हेप्तुल्ला ने कहा, “प्रधानमंत्री ने विशेष जोर दिया है कि सरकार खासतौर से गरीबों के लिए समुचित स्वच्छता, पेयजल, मातृत्व और शिशु देखभाल को शीर्ष प्राथमिकता दे.”

रिपोर्ट जारी करते हुए भारत में संयुक्त राष्ट्र की स्थानीय समन्वयक लिज ग्रैंड ने कहा, “वैश्विक विकास में भारत की भूमिका दुनिया में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. वैश्विक स्तर पर सहस्राब्दि लक्ष्य तब तक हासिल नहीं हो सकते, जब तक उन्हें यहां हासिल नहीं किया जाता.”

रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया ने काफी प्रगति की है, लेकिन उन्हें और प्रगति करनी है.

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