रेल से लातूर पहुंचा पानी

Tuesday, April 12, 2016

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'वाटर ट्रेन'

लातूर | समाचार डेस्क: शायद भारत के इतिहास में पहली बार पानी लेकर कोई रेलगाड़ी पहुंची है. पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे लातूर में रेलमंत्री सुरेश प्रभु के हस्क्षेप के बाद पानी से भरी रेल पहुंची है. इससे जिले के लोगों की प्यास बुझाई जायेगी. चारों तरफ से समुद्र से घिरे तथा ज्यादातर नदियों के किनारे बसे सभ्यताओँ वाले देश भारत के लिये यह अजीबोगरीब घटना जरूर है परन्तु आज यह लातूर की जरूरत बन गया है. यदि लातूर में पीने का पानी न पहुंचता तो वहां पहले से मचे हाहाकार के बाद कोई बड़ी घटना जरूर घट जाती. भारतीय रेलवे की ‘जल रेलगाड़ी’ करीब 5,50,000 लीटर पेयजल की सौगात लेकर मंगलवार को महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त जिले लातूर पहुंच गई.

अधिकारियों ने कहा कि भारतीय रेलवे ने सोमवार को पश्चिमी महाराष्ट्र के मिराज से पानी भरकर 10-वैगन ट्रेन महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पड़ने वाले लातूर शहर के लिए रवाना की थी.

यह ‘जल रेलगाड़ी’ करीब 375 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां मंगलवार तड़के करीब चार बजे पहुंची. यहां इसका लातूर के महापौर, शीर्ष नागरिकों व पुलिस अधिकारियों ने स्वागत किया. इस दौरान रेलवे स्टेशन के आसपास कड़ी सुरक्षा थी.

पानी भेजने की यह पहल कई दिन पहले केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने की थी. उनके गृह राज्य महाराष्ट्र के कई हिस्से विशेषकर लातूर जिले के गांव गंभीर जलसंकट से जूझ रहे हैं, जिनकी आबादी करीब 2.45 करोड़ है.

प्रभु के दिशा-निर्देश के बाद पिछले दिनों 50 टैंक वैगन राजस्थान के कोटा वर्कशॉप भेजे गए थे, जहां उन्हें अच्छे से साफ किया गया और आगे की यात्रा के लिए सांगली भेज दिया गया.

भारतीय रेलवे की लातूर के सूखाग्रस्त गांवों की प्यास बुझाने के लिए ऐसी और ट्रेनें भेजने की योजना है. इन्हें भेजे जाने का समय फिलहाल तय नहीं है.

मौजूदा समय में राज्य में करीब 15,000 गांव गंभीर जलसंकट से जूझ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश गांव लातूर, बीड और उस्मानाबाद जिले में आते हैं.

कैबिनेट सचिव ने दिल्ली में मंगलवार देश में पानी की कमी वाले और सूखा ग्रस्त क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की.

सभी सूखा ग्रस्त राज्यों के मुख्य सचिव बैठक में शामिल हुए. भारत सरकार के कृषि, ग्रामीण विकास, पेयजल, पशुपालन, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, जल संसाधन, गृह, वित्त और रेल जैसे संबद्ध विभागों और मंत्रालयों के सचिवों ने भी विचार विमर्श में भाग लिया.

इसमें तय किया गया कि राहत देने के लिए रेल और पानी के टैंकरों के जरिए जल आपूर्ति जारी रखी जानी चाहिये.

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