सांसद, विधायक से बड़ा मांझी पटेल गायता

Tuesday, December 8, 2015

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छत्तीसगढ़ आदिवासी

कांकेर | तामेश्वर सिन्हा: आदिवासी महिलाओं के साथ अत्याचार और आउटसोर्सिंग के खिलाफ निकली संवैधानिक जन जागरण पदयात्रा आज कांकेर पहुंची. यह यात्रा 5 दिसंबर को जगदलपुर से निकली है. अपनी तरह की इस अनूठी यात्रा को लेकर पूरे बस्तर में उत्साह का वातावरण बना हुआ है. लंबे समय के बाद बस्तर के इलाके में इस तरह की पदयात्रा के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं लेकिन पदयात्रा में शामिल लोगों के लिये अपना मुद्दा सबसे बड़ा है और उनका दावा है कि वे अपना हक़ ले कर रहेंगे.

बस्तर राज की दंतेश्वरी याया के अंगरक्षक आंगापेन नरसिंह नाथ, बड़ेडोंगर की आंगापेन तथा बेड़मामारी केशकाल की आंगापेन बुम मुदिया इस आंदोलन में मचांदुर चारामा तक पदयात्रा में अगुवाई कर रहे हैं.

इस पदयात्रा को बस्तर के इतिहास में आंगापेनों का अत्याचार के खिलाफ और परम्परागत ग्रामसभा मतलब पूर्व की व्यवस्था को तहस-नहस करने के विरोध के रुप में गायताओं के द्वारा बताया जा रहा है.

इस पदयात्रा में शामिल लोग अपनी इस यात्रा में संविधान को न मानने वाला देशद्रोही, पांचवी अनुसूची क्षेत्र बस्तर में धारा 244(1) को न मानने वाला देशद्रोही, पांचवी अनुसूची क्षेत्र बस्तर में नगरीय निकाय अधिनियम असंवैधानिक है, पांचवी अनुसूची क्षेत्र बस्तर में गौ रक्षा अधिनियम लागू करने वाला देशद्रोही, पांचवी अनुसूची के प्रावधान को नहीं मानने वाला अर्थात् संविधान को नहीं पालन करने वाला देशद्रोही है; जैसे नारे गढ़ते हुये पारंपरिक परिभाषाओं को भी सवालों में घेरे में खड़े कर रहे हैं.

सर्व आदिवासी समाज के नारायण मरकाम का कहना है कि आउटसोर्सिंग द्वारा बाहरी व्यक्तियों की भर्ती करना बस्तर संभाग के बेरोजगारों के साथ घोर अन्याय है. बस्तर को मिले विशेष संवैधानिक अधिकार नियमों की सरकार द्वारा खुली हत्या की जा रही है.

मरकाम कहते हैं-”नक्सली हिंसा से जूझ रहे बस्तर के लिए सरकार के फैसले से विस्फोटक स्थिति उत्पन्न होगी. सरकार ने अगर हमारी बात नहीं मानी तो हमें उग्र आंदोलन के लिये बाध्य होना पड़ेगा.”

आदिवासी समाज के बस्तर संभाग के युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष युगेश सिन्हा भी मानते हैं कि एक तरफ तो सरकार शिक्षकों की भर्ती में आउटसोर्सिंग कर रही है और दूसरी ओर उत्तर बस्तर कांकेर जिला पंचायत में ही बड़ी संख्या में स्थानीय बेरोजगार इंतजार में हैं.

सिन्हा आरोप लगाते हुये कहते हैं- “सरकार की सारी चिंता अपने लोगों की भर्ती से जुड़ी हुई है. हमारी यह पदयात्रा सरकार को चेताने के लिये है. फिर भी अगर सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती तो एससी, एसटी और ओबीसी के हज़ारों नौजवान सड़कों पर उतरने के लिये बाध्य होंगे.”

इस पदयात्रा में नुक्कड़ सभा के द्वारा पांचवी अनुसूची के तहत परम्परागत ग्राम सभा में मांझी, मुखिया, गायता, पटेल व कोटवार की महत्ता को बताया जा रहा है. इस पदयात्रा में 500 से अधिक युवक युवतियां सामाजिक पदाधिकारियों एवं आंगापेन के मार्गदर्शन में चल रहे हैं.

यह पदयात्रा दस दिसंबर को छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र वीर शहीद नारायण सिंह बिंझवार की शहादत दिवस के दिन ही पांचवी अनुसूची क्षेत्र की अंतिम सीमा मचांदुर चारामा में विशाल आमसभा के रुप में बस्तर में पुनः पेन साम्राज्य की पुनर्स्थापना का वचन लेकर समापन होगी.

यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि पांचवी अनुसूची में प्रदत मांझी, मुखिया, गायता, पटेल ग्राम प्रमुखों की परम्परागत शांति पूर्ण व्यवस्था अर्थात् पांचवी अनुसूची को नष्ट कर सामान्य प्रशासन को जबरदस्ती थोप करके अराजक व्यवस्था लादा गया है. आंदोलनकारियों का दावा है कि यह संविधान के अनुच्छेद 244(1) का घोर उल्लंघन है.

आज कांकेर पहुंची यात्रा में वक्ताओं ने कहा कि 5वीं अनुसूची क्षेत्र में रक्षक ही भक्षक बन गये हैं और सरकार इन्हें बचा रही है. अब तो सरकार आऊटसोर्सिंग नामक साजिश से पहले हमें मौलिक रोजगार से वंचित कर रही है. उसके बहाने बाहरी लोगों को यहाँ घुसपैठ कराना चाहती है और हमें जल,जंगल, जमीन. से बेदखल करने का साजिश है.

वक्ताओं ने कहा कि पेसा कानून की धज्जियां उड़ाकर पारम्परिक ग्रामसभा के अधिकारों को पंगु बना दिया गया है. टाटा एस्सार, रावघाट जैसी परियोजनाओं में मूल निवासियों को विस्थापित कर बाहरी लोगों को बसाया जा रहा है, जो पांचवी अनुसूची का उल्लंघन है.

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