स्वामी स्वरूपानंद के समर्थन में उतरे साधु-संत

Thursday, July 3, 2014

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स्वामी स्वरूपानंद

रायपुर | एजेंसी: नर्मदा नदी के उदगम स्थल अमरकंटक के साधु-संत शारदापीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी स्वरूपानंद महाराज के समर्थन में उतर आए हैं. उन्होंने स्वामीजी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पर एतराज जताते हुए कहा है कि स्वामीजी का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अमरकंटक के बर्फानी आश्रम में हुई साधु-संतों की बैठक में अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी रामकृष्णनांद ने कहा कि प्राचीन स्थानों पर सांई की प्रतिमा स्थापित कर देवी-देवताओं को नीचे बिठाया जाता है, जिसे हम कभी स्वीकार नहीं कर सकते.

शांतिकुटी के रामभूषण दास ने स्वामी स्वरूपानंद महाराज द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सहमति जताते हुए उनका अपमान करने वालों पर कार्रवाई की बात कही. स्वामी महेश चैतन्य ने शास्त्र, परंपरा को मान्य एवं सर्वोपरि बनाए रखने की आवश्यकता जताई. ओंकारेश्वर के स्वामी किंकर विद्यानंद महाराज, ब्रह्मचारी नर्मदानंद सहित अन्य साधु-संतों ने स्वामी स्वरूपानंद महाराज के बयान का समर्थन किया और कहा कि स्वामीजी ने सांई बाबा के प्रति जो भी कहा है, उसमें कोई गलत नहीं है.

बैठक की अध्यक्षता कर रहे बर्फानी आश्रम के महामंडलेश्वर योगाचार्य संत लक्ष्मणदास बालयोगी ने कहा सनातन धर्म से सांई बाबा का कोई लेना-देना नहीं है. वे अपने समय के सूफी संत थे. हो सकता है कि वे चमत्कारी रहे होंगे, लेकिन उन्होंने कहीं भी देवी-देवताओं का मंदिर नहीं बनवाया और न ही साधु समाज से जुड़े रहे. ऐसे में उनके अनुयायियों द्वारा सांई की परंपरा को सनातन धर्म से जोड़ना गलत है.

फलाहरी आश्रम के महंत राघवदास ने कहा कि समाज में झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं. कपिलधारा के सुधांशु मुनि ने कहा कि स्वामीजी का किसी राजनीतिक दलों से कोई लेना-देना नहीं है. धार्मिक मुद्दे को धार्मिक तरीके से धर्माचार्यो द्वारा सुलझाया जाए. इसमें किसी प्रकार का धरना प्रदर्शन गलत है. माई की बगिया के हनुमानदास ने इसे विदेशी विधर्मियों की साजिश बताते हुए कहा कि हम इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे.

नर्मदा मंदिर के पुजारी वंदे महाराज ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म के विरोध में सांई पूजा को स्थापित करने का षड़यंत्र किया जा रहा है. हम शास्त्र और आचार्य परंपरा के अनुयायी हैं. हम अपनी परंपरा का अनुशरण करेंगे. साधु संतों के लगातार इस तरह शारदापीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी स्वरुपानंद महाराज के समर्थन में सामने आते-जाने से अब मामला थमने के बजाये तूल पकड़ता दिख रहा है.

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