मजदूरों के हाथ काटने पर नोटिस

Monday, January 27, 2014

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भारतीय सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली | संवाददाता: छत्तीसगढ़ लाए गये दो मज़दूरों के हाथ काटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुये ओडीशा और आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है. मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम और न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है.

गौरतलब है कि मीडिया में यह खबर आई थी कि ओडीशा के जयपटना इलाके के नुआपाड़ा गाँव के रहने वाले दो मज़दूर नीलाम्बर धांगडा माझी और पिआलू धांगड़ा माझी के हाथ मज़दूर दलालों ने काट दिये हैं. यह घटना पिछले साल दिसंबर की है.

इन दोनों मजदूरों ने पुलिस को बताया था कि नुआपाड़ा ज़िले के दो दलाल परमे राउत और केला राउत ने उन्हें और उन्हीं के इलाक़े के दस दूसरे मज़दूरों को फ़सल की कटाई के बाद आंध्र प्रदेश में जाकर काम करने के लिए 10 से 15 हजार रुपए बतौर पेशगी दिए थे. इसके बाद एक दिन दोनों दलाल उनके गांवो में पहुंचे और उन्हें ज़बरदस्ती एक जीप में डालकर ले गए.

मज़दूरों ने पुलिस को बताया कि रास्ते में जब मज़दूरों को पता चला कि उन्हें आंध्र प्रदेश के बजाए छत्तीसगढ़ ले जाया जा रहा है, तो उन्होंने इसका विरोध किया, लेकिन दलालों ने उनकी एक न सुनी. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जाते समय सीनापाली के पास एक जगह शौच के लिए गाड़ी रुकी तो उसमें सवार 12 मज़दूरों में से 10 मजदूर वहां से भाग खड़े हुए, लेकिन नीलाम्बर और पिआलू भाग नहीं पाए.

दूसरे मज़दूरों के भाग जाने से नाराज़ दलाल नीलाम्बर और पिआलू से दो लाख रुपए की मांग करने लगे, जो उन्होंने बतौर पेशगी सभी मजदूरों को दिए थे. ऐसे में उन्होंने इतनी बड़ी रकम देने में अपनी असमर्थता जताई. इसके बाद नाराज़ दलालों ने उनके दाहिने हाथ की हथेली यह कहते हुए काट दी कि अगर तुम हमारे लिए काम नहीं करोगे, तो हम तुम्हें किसी के लिए काम करने के लायक नहीं छोड़ेंगे.

बाद में इन मज़दूरों को भवानीपटना के ज़िला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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