‘सब्सिडी छोड़ो’ से कॉर्पोरेट दूर क्यों?

Friday, April 3, 2015

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रसोई गैस

बिलासपुर | जेके कर: टाटा समूह के चेयरमैन सायरस मिस्त्री ने अपने कर्मचारियों से एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की अपील की है. जिसका पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान ने स्वागत किया है. धर्मेन्‍द्र प्रधान ने सायरस मिस्‍त्री की उस पहल के लिए उनकी सराहना की, जिसके तहत कर्मचारी एलपीजी सब्सिडी लेना छोड़ देंगे और इस राशि को राष्‍ट्र निर्माण में लगाया
जाएगा. क्या सायरस मिस्त्री खुद के समूह तथा अपने कॉर्पोरेट बंधुओं से अपील करेंगे कि इस साल के बजट में केन्द्र सरकार द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी को नहीं मानेंगे तथा 30 फीसदी ही टैक्स देंगे जिससे राष्ट्र का और ज्यादा विकास हो सके.

उल्लेखनीय है कि साल 2014-15 के बजट में प्रत्यक्ष करों में 8,315 करोड़ रुपयों की छूट दी गई है जिसका सीधा लाभ बड़े घरानों की तिजोरी को होगा. वहीं, अप्रत्यक्ष करों में 23,383 करोड़ रुपयों का इज़ाफा किया गया है जिसका भुगतान आम जनता को रोजमर्रा के खरीददारी में करना पड़ेगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार, 27 मार्च को देश के जनता से अपील की थी कि सक्षम लोग एलपीजी पर मिलने वाले सब्सिडी को छोड़े जिससे बचत होगी तथा इसका उपयोग ग्रामीण विकास में किया जायेगा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वे लोग जिन्हें एलपीजी सब्सिडी की जरूरत नहीं है और वे बिना सब्सिडी के बगैर अपना जीवनयापन करने में सक्षम हैं, उन्हें इसे छोड़ देना चाहिए. मैं आपसे इस अभियान से जुड़ने का आह्वान करता हूं. ईंधन सब्सिडी छोड़ दीजिए. एक रिकॉर्ड स्थापित कीजिए. जो सब्सिडी आप छोड़ेंगे, उससे आगे चलकर गरीबों को लाभ मिलेगा.”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “लोग पहले से ही अपनी सब्सिडी छोड़ रहे हैं. 2.8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी है, जिससे 100 करोड़ रुपये की बचत होगी.”

जाहिर है कि 2.8 लाख लोगों में केवल देश के विकास के लिये 100 करोड़ रुपये देने की क्षमता है जबकि केवल कुछ हजार कॉर्पोरेट मिलकर ही देश को एक साल में 8,000 करोड़ रुपयों से ज्यादा देने की क्षमता रखते हैं. सवाल किया जाना चाहिये कि देश के विकास के लिये कौन सी छूट या सब्सिडी ज्यादा महत्व रखती है, आमं जनता को दी जाने वाली छूट या कॉर्पोररेट घरानों को दी जाने वाली छूट?

ऐसा नहीं है कि कॉर्पोरेट घरानों को हाल ही में छूट दी जा रही है. यह खेल 2006-07 से शुरु हुआ था. साल 2014 में मशहूर लेखक और वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ का कहना था कि सरकार ने पिछले नौ सालों में कंपनियों को 365 खरब रुपए की टैक्स छूट दी है. जो कि कॉर्पोरेट टैक्स, उत्पाद शुल्क तथा सीमा शुल्क के रूप में है.

कुल मिलाकर मामला मैं छूट का फायदा उठाऊ तथा तू देश के विकास के लिये बलिदान दे वाला नज़र आता है.

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