सौर ऊर्जा से रोशन होगी सेंट्रल जेल

Friday, November 22, 2013

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सौर ऊर्जा

जगदलपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में इंद्रावती नदी के तट पर बनी कारावास की नई बैरकों में सौर ऊर्जा से रोशनी की जाएगी. इतना ही नहीं बस्तर की पुरानी केंद्रीय कारा में 10 किलोवाट सौर ऊर्जा का विद्युत संयंत्र भी लगाया जा रहा है. इससे 20 बैरकों सहित प्रशासनिक भवन तथा परिसर आने वाले कुछ महीनों में रोशन हो उठेगा.

सूबे की सबसे संवेदनशील माने जाने वाली बस्तर की केंद्रीय कारा में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आए दिन नए इंतजाम हो रहे हैं. इसके तहत कारावास में बंद 1500 से अधिक कैदियों पर सौर सुरक्षा विधि से निगाहें रखी जा सकेगी. पिछले दिनों केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से इस परियोजना को मंजूरी मिली थी. जेल में 10 किलोवाट की सौर इकाई लगनी शुरू हो गई है. अगले 5-7 दिनों में यह काम पूरा हो जाएगा. इस व्यवस्था से जेल में बिजली जाने पर जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं होगी.

बताया जाता है कि 648 कैदियों को रखने की क्षमता वाली इस जेल में फिलहाल 1500 से अधिक कैदियों को रखा गया है, जिसमें नक्सली मामलों के विचाराधीन कैदियों की संख्या अच्छी खासी है. क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जेल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. कुछ दिनों पहले पुलिस एवं जिला प्रशासन की टीमों ने दो बार औचक निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया था. उसके बाद कुछ नई चीजों को भी जोड़ा गया है, अब इसी चरण में सौर सुरक्षा प्रणाली को जल्द चालू किया जा रहा है.

बस्तर में केंद्रीय कारा के अलावा दंतेवाड़ा तथा कांकेर में भी जिला कारावास है. सभी कारावासों में क्षमता से अधिक कैदी हैं. दंतेवाड़ा में जेल तोड़ने कर भागने की घटना के बाद सुरक्षा के इंतजाम काफी मजबूत किए गए हैं. पहले चरण में केंद्रीय कारा में सौर ऊर्जा विधि से सुरक्षा चक्र अपनाया जा रहा है. इसके बाद दूसरे चरण में कांकेर और दंतेवाड़ा की जेलों में भी यह व्यवस्था होगी.

केंद्रीय जेल के अधीक्षक राजेंद्र कुमार गायकवाड़ ने बताया कि सौर सुरक्षा प्रणाली बिजली की सुरक्षित व्यवस्था है. इससे सुरक्षा के उपाय बढ़ेंगे साथ ही हर महीने बिजली बिल की बचत भी होगी.

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