शिवसेना के भाग्य से भाजपा हारी!

Wednesday, September 17, 2014

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उद्धव ठाकरे

मुंबई | विशेष संवाददाता: उपचुनाव में भाजपा ने अपने कब्जे वाली 23 में से 13 सीट खो दी है. इससे लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के विजय पताका के बोझ तले दबी शिवसेना ने ऐन विधानसभा चुनाव के पहले अपना मुंह खोल दिया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी की तरफ इशारा करते हुए कहा, “मतदाताओं को हल्के में न लें. वे बहुत समझदार हैं. पांव जमीन पर रखें और हवा में तलवारबाजी न करें.” गौरतलब है कि मुंबई के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में भाजपा पहले की तुलना में ज्यादा सीट की मांग कर रही है. जबकि शिवसेना ने मोदी के लोकसभा चुनाव लड़ने के तर्ज पर उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने की रणनीति बनाई है. जाहिर है कि अपनी इसी रणनीति के चलते शिवसेना ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है.

दूसरी ओर, भाजपा के संबंध में कहा जा रहा है कि वह महाराष्ट्र में बड़े भाई की भूमिका चाहती है. इसी कारण से भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में अपने सहयोगी शिवसेना की बनस्पित ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को आये उपचुनाव के नतीजों के भाजपा के आशा के विपरीत हैं तथा इससे शिवसेना को अपना गठबंधन भाजपा के साथ तोड़े बिना ही उससे मोल-भाव करने का मौका प्रदान किया है.

उपचुनाव में भाजपा को लगे झटकों में शिवसेना अपना हित देख रही है अन्यथा शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय के माध्यम से भाजपा को “पांव जमीन पर रखें और हवा में तलवारबाजी न करें” जैसी टिप्पणी करने का मौका नहीं मिलता. शिवसेना ने बुधवार को कहा 13 सिंतबर को हुए उपचुनाव का नतीजा ‘अनापेक्षित और हैरानी भरा’ है. इसने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले इससे सीखने की आवश्यकता है.

संपादकीय में यह बातें भाजपा को उत्तर प्रदेश और राजस्थान उपचुनाव में मिले झटके के बाद कही गई हैं. हालांकि संपादकीय में कहा गया है “चुनाव के नतीजे अनापेक्षित, हैरानी भरे हैं” परन्तु शिवसेना का निशाना महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के पहले अपने मोल-भाव करने की क्षमता को बढ़ाने से है. शिवसेना के संपादकीय से इतना तो स्पष्ट है कि भले ही उपचुनाव के नतीजों से सरकार पर कोई आंच नहीं आने वाली है परन्तु एनडीए के घटक दल लोकसभा चुनाव के बाद दबाव की जगह राहत महसूस कर रहें हैं.

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