राज्यपाल ने गिनाई उपलब्धियां

Sunday, January 26, 2014

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शेखर दत्त

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल शेखर दत्त ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जनता के सशक्तिकरण के लिए नई सोच के साथ कई नए तरीके भी अपनाए गए हैं.

राज्यपाल शेखर दत्त ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर रविवार को राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित समारोह में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहरा कर परेड की सलामी ली और प्रदेशवासियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि गणतंत्र की एक बड़ी कसौटी निष्पक्ष चुनाव से संसदीय लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखना है. राज्य में विधानसभा चुनाव शांतिपूर्वक सम्पन्न हुए, मतदान का प्रतिशत सर्वाधिक रहा, जो मतदाताओं की बढ़ती जागरूकता का प्रतीक है.

उन्होंने कहा कि प्रदेश की सर्वाधिक आबादी की आजीविका का साधन खेती-किसानी है, इसलिए किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने को राज्य सरकार ने सबसे पहली प्राथमिकता दी है. किसानों को सिंचाई के लिए निर्धारित मात्रा में निःशुल्क एवं सुलभ बिजली आपूर्ति, कृषि उपकरणों की खरीदी में सब्सिडी, प्रामाणिक बीज तथा खाद प्रदाय, एक प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण, सीमांत किसानों को ऋण माफी जैसी अनेक सुविधाएं देने से अन्नदाताओं का उत्साह बढ़ा और उन्होंने खूब मेहनत कर राज्य में सर्वाधिक अनाज उत्पादन का कीर्तिमान रचा. राज्य को वर्ष 2010-11 में, देश में धान उत्पादन में सर्वाधिक वृद्धि के लिए राष्ट्रीय ’कृषि कर्मण पुरस्कार’ मिला था और अब 2012-13 के लिए पुनः इस सम्मान के लिए चुना गया है.

श्री दत्त ने आगे कहा कि’छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम-2012’ लागू कर, जनता को भोजन और सुपोषण का अधिकार देने वाला पहला राज्य बनने का गौरव छत्तीसगढ़ ने पाया है. अब एक रुपए प्रति किलो की दर से 35 किलो चावल अथवा गेहूं प्रतिमाह देने की शुरूआत भी कर दी गई है, जिसका लाभ राज्य में 48 लाख अतिरिक्त गरीब परिवारों सहित कुल 65 लाख परिवारों को मिलेगा. इस अधिनियम के माध्यम से भूख मुक्ति, कुपोषण मुक्ति, आयोडीन-प्रोटीन की पूर्ति के साथ ही महिला अधिकारों का सशक्तीकरण भी सुनिश्चित किया गया है. सभी गरीब परिवारों को निःशुल्क नमक, आदिवासी बहुल विकासखंडों में चना एवं अन्य विकासखंडों में दाल, काफी रियायती दर पर दी जा रही है. राशन कार्डों पर वरिष्ठ महिला सदस्य का नाम मुखिया के रूप में दर्ज किया गया, यह उपलब्धि भी देश में अपने तरह के पहले कार्य के रूप में दर्ज हुई है.

श्री दत्त ने कहा कि बच्चों तथा महिलाओं की कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावशाली ढंग से चलाने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में, मध्यान्ह भोजन, पूरक पोषण आहार तथा विद्यार्थियों को गणवेश वितरण से संबंधित सभी कार्य महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित किए जाएं. इस फैसले से कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी बढ़ेगी, क्योंकि इसमें महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं की सीधी भागीदारी हो जाएगी. इतना ही नहीं राज्य सरकार इन सभी कामों के लिए आवश्यक कौशल के विकास हेतु इन समूहों को विधिवत प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी करेगी. राज्य सरकार ने अपना वायदा निभाते हुए, उन परिवारों की चिंता भी की है, जिनके पास ढाई एकड़ या उससे भी कम कृषि भूमि है. ऐसे लगभग 17 लाख खेतिहर मजदूर परिवारों की जिन्दगी संवारने के लिए ’अटल खेतिहर मजदूर बीमा योजना’ प्रारंभ कर दी गई है, जो इन परिवारों को जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा एवं इनके बच्चों को छात्रवृत्ति की सुविधा देगी.

राज्यपाल ने कहा कि गांवों में अधिक रोजगार देने के लिए महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत हर जरूरतमंद परिवार को रोजगार गारंटी के दिन 100 से बढ़ाकर 150 करने वाला पहला राज्य छत्तीसगढ़ है. यही नहीं, गर्भवती महिला मजदूरों की आवश्यकताओं को समझते हुए, प्रसूति के समय उन्हें आराम तथा सुपोषण की सुविधा देने के लिए, एक माह का मातृत्व अवकाश भत्ता देने वाला पहला राज्य भी छत्तीसगढ़ है. अत्यंत गौरव का विषय है कि महात्मा गांधी नरेगा की राशि तथा अन्य विकास विभागों की योजनाओं को मिलाकर, ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार की अभिनव पहल राज्य में की गई, इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘महात्मा गांधी नरेगा कनवरजेंस’ की श्रेणी में वर्ष 2012-13 के प्रथम पुरस्कार हेतु भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को चुना गया है.

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करना, उन्हें अच्छा सामाजिक जीवन उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है. ‘सर्वधर्म समभाव’ से ‘छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना’ संचालित की जा रही है, इससे विभिन्न धर्मों और समुदायों के वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थ यात्रा का पुण्य लाभ मिल रहा है. बढ़ती जीवन प्रत्याशा एवं वरिष्ठता के अनुभवों का लाभ लेने के लिए राज्य सरकार तथा संबद्ध संस्थाओं के कर्मचारियों तथा अधिकारियों की सेवा निवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है.

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्वविद्यालय में वैश्विक मांग के अनुरूप नए विषयों पर पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी की बेहतरीन शिक्षा सुलभ कराने के लिए नया रायपुर में आई.आई.आई.टी. (ट्रिपल आईटी) की स्थापना का काम शीघ्र पूर्ण कर लिया जाएगा. ’छत्तीसगढ़ युवा सूचना क्रांति योजना’ के तहत महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं को लैपटॉप व टेबलेट का निःशुल्क वितरण किया गया है, जिससे वे देश और दुनिया के नवीनतम ज्ञान और अवसरों से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विगत वर्ष प्रारंभ की गई ’मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना’ का लाभ युवाओं को मिल रहा है.

श्री दत्त ने कहा कि’मुख्यमंत्री युवा भारत दर्शन योजना’ तीन जिलों से प्रारंभ की गई थी, अब राज्य के सभी जिलों के युवाओं को इसका लाभ मिलेगा. युवाओं को स्वरोजगार हेतु सुगमता से ऋण दिलाने के लिए ’मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ प्रारंभ की गई है, जिसके तहत 25 लाख रुपये तक ऋण बैंकों से मिलेगा. अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए अच्छे शिक्षण-प्रशिक्षण का इंतजाम किया गया है. ‘प्रयास’ संस्था रायपुर के बाद जगदलपुर तथा अम्बिकापुर में शुरू की गई है. ‘मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना’, ‘विज्ञान वाणिज्य शिक्षण प्रोत्साहन योजना’, ‘युवा कैरियर निर्माण योजना’, ‘मिनीमाता स्वावलम्बन योजना’, ‘शहीद वीरनारायण सिंह स्वावलम्बन योजना’ आदि ने इन वर्गों में नई उम्मीद जगाई है.

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ जनजातीय सलाहकार परिषद की अनुशंसा पर, संविधान में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए मेरे द्वारा राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों के हित में लिए गए निर्णयों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, जिनमें से बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिला संवर्गीय तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय निवासियों की भर्ती प्रक्रिया के सीधी भर्ती तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त में छूट एवं वन अधिकारों की मान्यता हेतु आवेदित निरस्त दावों को स्वमेव पुनरीक्षण की श्रेणी में रखने का प्रावधान प्रमुख है. वनग्राम वासियों को विकास के अच्छे अवसर उपलब्ध कराने हेतु वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित किया जा रहा है. राज्य के ग्रामीण अंचलों में लोकरंगों की अनोखी छटा बिखरी है. सरकार लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए व्यापक महत्व के स्थानों पर लोक महोत्सवों का आयोजन कर रही है. हाथकरघा, हस्तशिल्प, माटी शिल्प, बेल मेटल, काष्ठ शिल्प, लौह शिल्प आदि को उचित प्रशिक्षण, नए उपकरणों व विपणन की नई सुविधाओं से बढ़ावा दिया जा रहा है, इससे परम्परागत रोजगार के अवसर भी बेहतर आमदनी का जरिया बन रहे हैं.

श्री दत्त ने जनता को संबोधित करते हुए अपने संदेश में कहा कि शासन-प्रशासन के नवाचारी प्रयासों के कारण छत्तीसगढ़ को कई क्षेत्रों में ’मॉडल स्टेट’ की सराहना मिली है. राज्य के प्रयासों और उपलब्धियों के केन्द्र में आम जनता, गांव, गरीब और किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाएं तथा युवा रहे हैं, और रहेंगे. राज्य के विकास का सर्वाधिक लाभ इन वर्गों को देना सुनिश्चित किया जाएगा. सबको बराबरी का अधिकार तथा सुलभ न्याय मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार एक ओर जहां न्याय प्रणाली मजबूत बनाने में योगदान दे रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक, आर्थिक तथा अन्य विसंगतियां दूर करने के लिए भी लगातार काम कर रही है.

राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार एक ओर जहां संविधान के प्रावधानों के अनुसार प्रदेशवासियों को विकास के समान अवसर तथा बेहतर सुविधाएं देने के लिए तत्पर है, वहीं दूसरी ओर संविधान एवं लोकतंत्र विरोधियों, नक्सलवादियों व अन्य हिंसक तत्वों से भी सख्ती से निपटेगी. सुरक्षाबलों को बेहतर संसाधनों व सुविधाओं से सुसज्जित करने हेतु लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. नक्सल प्रभावित अंचलों में स्थानीय निवासियों का मनोबल बढ़ाने और विकास से विश्वास अर्जित करने के हर संभव उपाय किए जा रहे हैं.

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