काला धन: 627 की सूची पर 3 दिसंबर को सुनवाई

Wednesday, October 29, 2014

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भारतीय सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली | एजेंसी: सर्वोच्य न्यायालय ने बुधवार को सौंपे गये 627 विदेशी बैंकों के खातेदारों पर एसआईटी से कार्यवाही कर उसकी जानकारी 3 दिसंबर तक देने का आदेश दिया है. इसी के साथ विदेशी बैंकों में काला धन रखने वालों पर कानूनी कार्यवाही शुरु हो गई है. जिन्होंने टैक्स की चोरी की है उन मामलों में सर्वोच्य न्यायालय के कड़े रुख की उम्मीद की जा रही है. वास्तव में सर्वोच्य न्यायालय के इस कदम से एसआईटी की जांच तेज हो जायेगी. गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय को विदेशी बैंकों के भारतीय खाताधारकों के नामों की सूची सौंपी, जिनका खुलासा फ्रांस की सरकार ने किया है. न्यायालय ने यह सूची विशेष जांच दल को सौंपने के निर्देश दिए हैं. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच.एल.दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ को दो सील बंद लिफाफे सौंपे.

रोहतगी ने कहा कि इनमें से आधे खाताधारक भारत के निवासी हैं और ये खाते साल 2006 तक खोले गए थे.

उन्होंने कहा कि मामले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इनमें से कुछ ने कर अदा किए हैं, जबकि अन्य की जांच की जा रही है.

रोहतगी ने न्यायालय को बताया कि आयकर अधिनियम में संशोधन करते हुए इन खाताधारकों से कर लेने का समय बढ़ा कर 31 मार्च, 2015 कर दिया है.

पूर्व के प्रावधान के अनुसार, कर उगाही की अवधि छह साल तक के लिए थी, जो कि 2012 में समाप्त हो गई है.

न्यायालय ने 627 नामों की सूची के साथ ही फ्रांस सरकार के साथ इस मुद्दे पर हुए पत्र-व्यवहार से संबंधित दस्तावेज भी सीलबंद लिफाफे में एसआईटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एम.बी.शाह और उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिजित पसायत को सौंपने के निर्देश दिए. एसआईटी का गठन चार जुलाई, 2011 को किया गया था.

न्यायालय ने कहा कि एसआईटी कानून के तहत मामले पर कार्रवाई करेगी.

सभी खाते जेनेवा स्थित एचएसबीसी बैंक से जुड़े हुए हैं, जिसकी जानकारी फ्रांसीसी सरकार ने दी है.

ये सभी चोरी के आंकड़े के नाम से भी जाने जाते हैं और जब भारत सरकार ने स्विट्जरलैंड के अधिकारियों से मदद के लिए संपर्क किया तो उन्होंने इस मामले में मदद देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि वे चोरी के आंकड़े के संबंध में कुछ नहीं कर सकते.

हालांकि, एचएसबीसी बैंक ने कहा कि अगर सरकार को खाताधारकों की तरफ से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मिलता है, तब वह जानकारी साझा करेगी. इसके बाद 50-60 खाताधारकों ने इसकी मंजूरी दे दी.

रोहतगी ने न्यायालय को बताया कि भारत सरकार ने सिर्फ यह अनुरोध किया है कि इस बात का ख्याल रखा जाए कि इन देशों से सूचना इक्कट्ठी करने में किसी तरह की अड़चन न आए.

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार को भारतीय खाताधारक कंपनी व व्यक्तियों के नाम की सूची सीलबंद लिफाफे में सौंपने के निर्देश दिए थे, चाहे ये खाते वैध हों या किसी अन्य तरह के.

न्यायालय ने यह निर्देश केंद्र की तरफ से सात लोगों और एक कंपनी के नाम की सूची सौंपने के अगले दिन दिए थे. केंद्र ने कहा था कि इन धारकों ने कर अदायगी से बचने के लिए विदेशी बैंकों में धन जमा किए.

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