जहां सॉना बाथ में सब नंगे होते हैं!

Saturday, October 29, 2016

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steam bath

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: हमारे यहां कहावत है हमाम में सब नंगे होते हैं. अब किसने किसके हमाम में झांका है, परन्तु मौका आने पर इस कहावत को कहने से कोई नहीं चूकता है. इसके उलट, दुनिया में कुछ देश ऐसे हैं जहां के हमाम याने सॉना बाथ में सब नंगे होते हैं, क्या बॉस, क्या महिला सहकर्मी, सब कपड़े उतारकर नंगे नज़र आते हैं. जाहिर है कि जहां पर बॉस व कर्मचारी हमाम में एक साथ नहाते हैं वहां समाजवाद होगा, परन्तु नहीं, वहां समाजवाद नहीं ‘हमाजवाद’ है. अर्थात् मामला केवल सॉना बाथ लेने तक ही सीमित है. मिसाल के तौर पर कुछ देशों के बारे में जानना दिलचस्प होगा. इसके लिये पढ़िये बीबीसी हिन्दी में लेनॉक्स मॉरीसन के मूल लेख का हिन्दी अनुवाद-

क़रीब 55 लाख की आबादी वाले फिनलैंड में हर दो लोगों के लिए एक सॉना बाथ सेंटर है. कमोबेश हर कंपनी के दफ़्तर में सॉना बाथ सेंटर या भाप लेने का कमरा बना होता है.

फिनलैंड की सॉना सोसाइटी की कैटरीना स्टाइर्मन कहती हैं कि वहां बराबरी का माहौल है. ऐसे में अक्सर लोग अपने बॉस के साथ भाप लेने सॉना सेंटर जाते हैं. वहां जाकर लोग अपने पद को भूल जाते हैं. वहां एक साथ दो इंसान होते हैं, जो आपस में तमाम मसलों पर बात करते हैं.

फिनलैंड में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग सॉना सेंटर बने हैं. वहीं जर्मनी में दोनों के लिए एक ही सॉना होते हैं.

बेल्जियम से जाकर फिनलैंड में काम करने वाले क्रिस्टॉफ मिनार्ट जब पहले दिन सॉना में गए तो उन्हें ज़बरदस्त झटका लगा. वहां उनके बॉस ने बड़े आराम से अपने सारे कपड़े उतारे और सॉना लेने के लिए बैठ गए. अपने बॉस को बिना कपड़ों के देखना क्रिस्टॉफ को बेहद अजीब लग रहा था.

फिर उनके सामने ख़ुद के कपड़े उतारना तो और भी शर्मनाक. मगर धीरे-धीरे क्रिस्टॉफ को इसकी आदत हो गई. हर शुक्रवार को वो अपने बॉस या दूसरे साथियों के साथ सॉना लेने जाते हैं. आराम से कपड़े उतारकर बैठते हैं. कई बार वो सॉना लेने के बाद बिना कपड़ों के ही छत पर बैठकर बीयर पीते है, तमाम मसलों पर चर्चा करते हैं.

नोकिया में सीनियर वाइस प्रेसीडेंट टॉमी उइतो कहते हैं कि सॉना में कोई पद नहीं होता, कोई कपड़े नहीं होते. वहां एक इंसान का दूसरे इंसान से बिना किसी बनावट के सामना होता है.

उइतो बताते हैं कि नोकिया के फिनलैंड के हर दफ़्तर में सॉना बना हुआ है. पहले तो वहां दफ़्तर की बैठकें भी होती थीं. लेकिन फिनलैंड में मर्दों और औरतों के लिए अलग सॉना होते हैं.

इसलिए अक्सर उन्हें दो गुटों में बंटकर मीटिंग करनी पड़ती थी, जो अटपटा लगता था. इसी वजह से सॉना के दौरान बैठकों का चलन उनकी कंपनी में ख़त्म हो गया.

वैसे अलग-अलग देशों में सॉना की ज़रूरत अलग तरह की होती है. जर्मनी में लोग अच्छी सेहत के लिए सॉना जाते हैं. वहीं, फिनलैंड में लोग एक-दूसरे से मिलने-बतियाने के लिए सॉना जाते हैं.

फिनलैंड में भाप लेने के कमरों में लोग ख़ुद कोयले पर पानी डालते हैं. वहीं, जर्मनी और नीदरलैंड में इसके लिए अलग से एक कर्मचारी होता है.

दूसरे देशों से जाकर फिनलैंड या जर्मनी में काम करने वालों को ये सॉना संस्कृति अटपटी लग सकती है. ब्रिटेन के सैम क्रिश्ले को ही लीजिए. जब वो हॉलैंड के एम्सटर्डम शहर में नौकरी करने गए, तो शुरू में वो सहकर्मियों के साथ सिर्फ़ स्क्वैश खेलने जाते थे. उसके बाद कमोबेश हर इंसान कपड़े उतारकर सॉना लेने जाता था.

एक दिन हिम्मत करके सैम भी जा पहुंचे. वो भाप लेने के कमरे में बिना कपड़ों के बैठे हुए थे कि अचानक से उनकी एक महिला सहकर्मी वहां से निकली. उसने पूछा भी कि क्या यहां से निकलकर वे डिनर के लिए आ रहे हैं.

जब तक सैम इस सदमे से संभल पाते, उन्होंने भाप से परे होकर देखा तो उनकी कुछ और महिला सहकर्मी भी बिना कपड़ों के वहां बैठी भाप ले रही थीं. मारे शर्म के सैम अपने आपको छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगे. लेकिन, अब उन्हें आदत हो गई है.

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