महानदी जोड़ती है तोड़ती नहीं

Thursday, August 25, 2016

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महानदी

सारंगढ़ | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ में महानदी विवाद पर जनसंगठनों की संगोष्ठी हुई. 24 अगस्त 2016 को सारंगढ़ में संयुक्त नागरिक पहल के तहत “महानदी जोड़ती है, तोड़ती नही” पर केन्द्रित एक संगोष्ठी हुई. संगोष्ठी का आयोजन इंटेक रायगढ़ सारंगढ़ चेप्टर एवं संबलपुर उड़ीसा चेप्टर के तत्वावधान में हुआ. इस संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में पानी, कृषि, एवम् पर्यावरण पर काम करने वाले संगठन और महानदी के किनारे के 50 गांवों के ग्रामीण उपस्थित थे.

इस संगोष्ठी में महानदी सहित नदियों को बचाने, बने बांधों द्वारा हुए विस्थापन, नदियों के पानी का औद्योगिक उपयोग, खासकर पानी निगलने एवं धुआँ उगलने वाले तापविद्युत गृहों से हो रहे नुकसान एवं सामाजिक तनाव पर सार्थक चर्चा हुई. वक्ताओं ने महानदी के पानी को लेकर हो रही निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा दोनों प्रदेश की जनता के बीच वैमनस्य फैलाने की तीखी आलोचना किया.

वरिष्ठ साहित्कार सतीश जायसवाल ने महानदी के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक और उसपर निर्भर जातियों की वर्तमान स्थित पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हीराकुंड बांध सहित अन्य बांध बनने के बाद आज एक बार फिर नव परिवहन की बातें हो रही है, जो नदियों के बहते रहने की शर्तों पर ही संभव होगा.

चर्चा में रायपुर, बिलासपुर, भुवनेश्वर, संबलपुर, बरमकेला, सरिया, सांकरा, कोसीर, चंन्द्रपुर, नदी गांव, बालपुर, दुर्ग, भिलाई, तुमगांव, सुन्दरगढ, डभरा, भुवनेश्वर पोरथ आदि के सामाजिक संगठनों के लगभग दो सौ लोगों की उपस्थिति थे.

इस बैठक में छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ल ने कहा कि दोनों राज्य सरकारें गलत तत्थों को बताकर जनता को गुमराह कर रहे है. उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक करें कि कितना पानी उधोगपति को देने का अनुबंध किया है. वक्ताओं ने महानदी के पानी को लेकर हो रही निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा दोनों प्रदेश की जनता के बीच वैमनस्य फैलाने की तीखी आलोचना की.

यह संगोष्ठी इस नतीजे पर पहुंची कि महानदी को लेकर राजनीति बंद होनी चाहिये. महानदी दो राज्यों छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा की जनता को जोड़ती है उसे तोड़ने का प्रयास न किया जाये. नदी और उसके पानी पर पहला हक उसके किनारों पर बसने वाले रहवासियों का है उद्योगों का नहीं.

अगली बैठक ओडिशा में आयोजित की जायेगी जहां दोनों राज्यों के जन संगठन तथा ओडिशा में महानदी के किनारे बसने वाले लोग भाग लेंगे. उस बैठक में जन जागरण फैलाने के लिये महानदी के दोनों किनारों पर होनी वाली यात्रा को अंतिम रूप दिया जायेगा.

छत्तीसगढ़ चैप्टर के संयोजक ललित सुरजन ने कहा कि दोनों राज्य के सांस्कृतिक मेल को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि सामाजिक और अन्य संगठनों की जिम्मेदारी है कि ऐसा माहौल तैयार करें जिससे दोनों राज्य सरकार शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करें और जरूरत हो तो केंद्र सरकार को चर्चा में शामिल किया जायें.

सभा के सुचारू संचालन के लिये बने अध्यक्ष मंडल में सर्वश्री ललित सुरजन, महेन्द्र कुमार मिश्र, लिंग राज, सुदर्शन दास, महंत रामसुंदर दास शामिल थे.

अंत में सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव में दस सदस्यीय कोर कमेटी बनाने, दोनों प्रदेशों की राज्य सरकारों को ज्ञापन देने, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अविलंब बात करने अनुरोध, पानी पर हुए अध्ययन के आधार पर विभिन्न जगहों पर बैठक करने, यात्रा की तैयारियों के लिए उड़ीसा में एक बैठक करने आदि प्रस्ताव पारित किए गए. पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन परिवेष मिश्रा ने किया.

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