गांधी के हाथ में एके 47

Sunday, March 24, 2013

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संजय दत्त

क्या अच्छे काम का तमगा लग जाने के पश्चात बुरे काम की सजा माफ कर दी जानी चाहिये? कम से कम अभिनेता संजय दत्त को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पांच साल की सजा सुनाने के पश्चात जिस प्रकार से हवा का रुख बदल रहा है, उससे तो यही इंगित होता है.

1999 में मुंबई में हुए बम धमाको में संलिप्तता के कारण संजय दत्त को पहले ही टाडा अदालत ने 6 वर्ष की सजा सुनायी थी. सर्वोच्च न्यायालय ने इस सजा को घटाकर 5 साल कर दिया है. सर्वप्रथम प्रेस कांउसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्केण्डेय काटजू ने यह बात उठायी कि संजय दत्त की सजा माफ कर दी जाये क्योंकि वो आतंकवादी नही हैं. इसके पश्चात शिव सेना, समाजवादी पार्टी और एन सी पी ने भी इस मांग को दोहराया है. एक वातावरण बनाने की चेष्टा की जा रही है, जिसमें संजू बाबा को संवैधानिक प्रमुख अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए अपराधमुक्त कर दें.

इसके बाद आपको यह भी सुनने को मिलेगा कि सलमान खान की भी सजा माफ कर दी जाए क्योंकि वह अपराधी नही है, उसने तो केवल काले हिरण का शिकार किया था. सलमान खान के चाहने वालों की भी कमी नहीं. वे तो संजय दत्त से भी ज्यादा चर्चित व्यक्ति हैं. और हां, इस ढर्रे पर जेसिका लाल हत्याकांड के अभियुक्त मनु शर्मा की रिहाई भी निश्चित है. उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक डी पी यादव के पुत्र विकास यादव को भी छोड़ दिया जाना चाहिये जो जेसिका हत्याकांड में सहअभियुक्त है. आखिर उनके ‘माननीय’ पिता के योगदान को कैसे भुलाया जा सकता है. उन 300 सांसदो को भी बरी कर देना चाहिये, जिन पर कई अपराधों के प्रकरण दर्ज हैं.

छत्तीसगढ़ के वर्तमान पंचायत मंत्री तथा पूर्व गृहमंत्री रामविचार नेताम ने भी अपने कार्यकाल में अपने परिजनो को उनके अपराध से मुक्त करवा दिया था. इसी प्रकार का कृत्य मायावती ने भी किया था एवं अखिलेश यादव ने भी किया है. उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को मुकदमे से मुक्ति दिलाई है.

एक बात बहुत साफ तौर पर समझने की जरुरत है कि सर्वोच्च न्यायालय तथा टाडा कोर्ट ने भावावेश में आकर नहीं बल्कि देश के कानून के मुताबिक सजा सुनायी है. कानून छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब, खास या आम नागरिक में भेद भाव नही करता. सौ अच्छे काम करने पर एक बुरे काम करने की छूट न तो कानून देता है न ही समाज को कोई ऐसा आत्मघाती फैसला लेना चाहिये. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अगर किसी की हत्या कर देते तो क्या उन्हें इस आधार पर माफ कर दिया जाता कि उन्होंने देश के लिये महानतम योगदान दिया है?

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