राइट टू रिजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

Friday, September 27, 2013

A A

भारतीय सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली | एजेंसी: सर्वोच्य न्यायालय ने भारतीय मतदाताओं को ‘राइट टू रिजेक्ट’ का अधिकार अपने एक युगान्तकारी फैसले के द्वारा प्रदान कर दिया है. यह फैसला 9 साल से लंबित एक जनहित याचिका पर निर्णय देते हुए शुक्रवार को सुनाया गया है.

ज्ञात्वय रहे कि निर्वाचन आयोग ने पहले ही ‘राइट टू रिजेक्ट’ का समर्थन किया था. इससे पहले अन्ना हजारे द्वारा ‘राइट टू रिजेक्ट’ का अधिकार मतदाताओं को देने के लिये आंदोलन चलाया गया था. अब मतदाता ईवीएम मशीन में ‘नन ऑफ द एबव’ यानी ‘उपरोक्त में

कोई नहीं’ के विकल्प का बटन दबा सकते हैं.

यह जनहित याचिका पीयूसीएल ने दायर की थी. जिस पर मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला दिया है.

यदि इसे लागू किया जाता है तो सबसे पहले छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मिजोरम के मतदाता इस अधिकार का उपयोग करेंगे.

अभी वर्तमान में अगर किसी मतदाता को चुनाव में खड़े सभी उम्मीवार नापसंद हैं तो उसे यह बात निर्वाचन अधिकारी के पास रखे रजिस्टर में दर्ज कराना पड़ता है. जिससे गोपनीयता भंग हो जाती है. इस कारण कोई भी इसका उपयोग नही करता है.

यह मतदाताओं के वापस बुलाने के अधिकार अर्थात राइट टू रीकाल से जुदा है.

Tags: , , ,