नाबालिगों से रेप की राजधानी है दिल्ली

Tuesday, July 15, 2014

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नई दिल्ली | समाचार डेस्क: देश का दिल कहे जाने वाला दिल्ली रेप की राजधानी भी बन गया है. दुखद ये है कि रेप की अधिकांश शिकार नाबालिग बच्चियां हैं. अधिकतर घटनाएं घरों के अंदर हुए और उनमें दोस्तों या जान-पहचान के लोगों की संलिप्तता पाई गई. दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में ये अचंभित कर देने वाले तथ्य सामने आए हैं. यह अध्ययन राष्ट्रीय राजधानी में बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए किया गया.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बलात्कार की 81.22 फीसदी घटनाओं में पीड़िता को उसके या आरोपी के घर में ही निशाना बनाया गया और बलात्कार के कुल 46 फीसदी मामलों में पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम है. बलात्कार करने वाले आरोपियों में 21 फीसदी पड़ोसी हैं, जबकि 41 फीसदी मामलों में आरोपी दोस्त या जान-पहचान वाले ही निकले. अध्ययन के अनुसार, 2.22 फीसदी मामलों में पीड़िता का पिता, 1.25 फीसदी मामलों में सौतेला पिता, 0.6 फीसदी मामलों में भाई, 1.34 फीसदी मामलों में तलाकशुदा पति, 1.8 फीसदी मामलों में चाचा या मामा और 3.5 फीसदी मामलों में कंपनी के मालिक शामिल पाए गए.

पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस अध्ययन में जनवरी, 2013 से इस वर्ष जून तक हुए बलात्कार के मामलों को शामिल किया गया. बलात्कार के 14 फीसदी मामलों में 16-18 आयुवर्ग की लड़कियों को निशाना बनाया गया, 19.25 फीसदी मामलों में 12-16 आयुवर्ग, 6.5 फीसदी मामलों में 7-12 आयुवर्ग और 7.75 फीसदी मामलों में 2-7 आयुवर्ग की बच्चियों को निशाना बनाया गया. अधिकारियों ने बताया कि दो वर्ष से कम उम्र की अबोध बच्चियां तक बलात्कार की शिकार पाई गईं. ऐसे मामले 0.3 फीसदी हैं. घटनास्थलों की बात करें तो 4.5 फीसदी घटनाएं झुग्गियों में, 1.5 फीसदी घटनाएं वाहनों में, तीन फीसदी घटनाएं पार्को में, 1.2 फीसदी घटनाएं दुकानों या कार्यालयों में, 2.5 फीसदी घटनाएं होटलों में और 0.75 फीसदी घटनाएं स्कूल या महाविद्यालयों में हुईं.

इस अध्ययन के अनुसार 99 फीसदी मामलों में संलिप्त आरोपी पहली बार अपराध में संलिप्त पाए गए, जबकि 1.6 फीसदी मामलों में अपराधी दूसरी बार अपराध में संलिप्त पाए गए. पिछले वर्ष राष्ट्रीय राजधानी में बलात्कार के 1,647 मामले दर्ज हुए, जबकि इस वर्ष में अब तक 984 बलात्कार के मामले दर्ज हो चुके हैं. अध्ययन में आगे कहा गया है कि 86 फीसदी बलात्कार के मामलों में एक आरोपी अपराध में संलिप्त पाया गया, जबकि दो फीसदी मामलों में दो आरोपी पाए गए. सिर्फ 1.5 फीसदी मामलों में दो से अधिक आरोपी अपराध में संलिप्त पाए गए. बलात्कार की शिकार होने वाली पीड़िताओं में 64 फीसदी न्यून आय वर्ग की पाई गईं.

इस अध्ययन के बाद पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस अध्ययन से पुलिस बल को महिलाओं पर होने वाले इस अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा कि दिल्ली पुलिस को इस अध्ययन के बाद पुलिसकर्मियों में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए भी एक कार्यक्रम शुरू करना चाहिए. हालांकि सामाजिक जागरुकता एक बड़ा मुद्दा है. ऐसे में कानून के प्रति लोगों का विश्वास और भय बने तो शायद इसमें कोई सुधार संभव है.

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