सांप्रदायिक हिंसा विधेयक पेश नहीं हुआ

Wednesday, February 5, 2014

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राज्यसभा

नई दिल्ली | एजेंसी: राज्यसभा में बुधवार को सांप्रदायिक हिंसा विरोधी विधेयक पेश करने के प्रयास में सरकार विफल रही. विधेयक के विरोध में संपूर्ण विपक्ष एकजुट हो गया जिससे सरकार को अपना कदम वापस खींचना पड़ा. विधेयक पेश करने में विफल रहने से सरकार को भारी शर्मिदगी का सामना करना पड़ा.

केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने यह टिप्पणी की कि यह विधेयक गुजरात में जैसा हुआ था उस तरह राज्य सरकार कानून एवं व्यवस्था के विरुद्ध काम करने लगे तो उस स्थिति से निपटने के लिए अनिवार्य है. सिब्बल के इतना कहते ही सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी.

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने उल्लेख किया कि यह विधेयक संघीय ढांचे के खिलाफ है. विधेयक का विरोध करते हुए जेटली ने कहा, “इस तरह का विधेयक लाना केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में नहीं है.”

वाम मोर्चा, डीएमके, एआईएडीएमके, और तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी विधेयक के विरोध में जेटली का समर्थन किया. इन पार्टियों ने भी इस बात से सहमति जताई कि यह राज्य सरकारों के अधिकार पर कुठाराघात है.

सिब्बल ने हालांकि यह स्पष्टीकरण दिया कि केंद्र सरकार के पास फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि यह शक्ति मानवाधिकार आयोग में निहित है.

सिब्बल ने कहा, “विधेयक के किसी भी प्रावधान से संघीय ढांचे पर असर नहीं पड़ेगा. केंद्र सरकार केवल तभी कार्रवाई करेगी जब राज्य की सहमति हासिल हो और शक्ति मानवाधिकार आयोग को दी गई है.”

जेटली ने हालांकि यह कहा कि मुद्दा लागू करने का नहीं है, बल्कि ‘इस तरह के कानून लागू करने की विधायी सक्षमता का है.’ उन्होंने कहा, “इस तरह का कानून लागू करने का अधिकार राज्य विधानसभाओं के पास है.”

कानून मंत्री ने कहा, “यह विधेयक उस स्थिति में जब राज्य कानून एवं व्यवस्था को बाधित करने में संलिप्त हो..जैसा गुजरात में हो चुका है, यदि राज्य सांप्रदायिक गतिविधि को प्रोत्साहन दे तब की जरूरत है.”

इस टिप्पणी से भाजपा के सदस्य भड़क गए और दोनों पक्षों से भारी हंगामा होने लगा. उपसभापति पी. जे. कुरियन ने इसके बाद विधेयक को टाल दिया.

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बुधवार को राज्यसभा में सांप्रदायिक हिंसा रोकने से संबंधित एक विधेयक पेश करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही दूसरी बार अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

सदन की बैठक दोपहर में जब दोबारा शुरू हुई तो शिंदे ने विधेयक सदन में पेश करना चाहा. इसके पहले सदन की बैठक शुरू होने के साथ ही कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी. विपक्ष के नेता अरुण जेटली विधेयक का विरोध करने के लिए खड़े हुए.

कुछ अन्य दलों के सदस्यों ने भी अपने मुद्दे उठाने की कोशिश की. जिसके कारण हंगामे की स्थिति पैदा हो गई. राज्यसभा के उपसभापति पी.जे. कुरियन ने उसके बाद सदन की कार्यवाही अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थिति कर दी.

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