गजेंद्र की मौत पर राजनीति न हो

Thursday, April 23, 2015

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राजनाथ सिंह-गृह मंत्री

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: राजनाथ सिंह ने कहा कि गजेन्द्र की मौत का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिये. इसी के साथ उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर विचार करना चाहिये कि क्यों ग्रामीणों तथा किसानों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने किसान के आत्महत्या को शर्मनाक कहा. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को उन आरोपों को खारिज किया है, जिसमें कहा गया है कि राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने कुछ नहीं किया. उन्होंने संकट से निपटने के लिए पुलिस के दृष्टिकोण को सही ठहराते हुए उसे स्पष्ट किया. लोकसभा में एक बयान जारी करते हुए मंत्री ने कहा कि घटना शर्मनाक है और संबंधित सभी लोगों को देश के किसानों के मुद्दों पर गौर करने के लिए एक साथ विचार करना चाहिए.

उन्होंने कहा, “पेड़ पर चढ़ने के लिए एक सीढ़ी मांगने के लिए पुलिस ने नियंत्रण कक्ष को सूचित किया. उन्होंने लोगों से ताली नहीं बजाने के लिए भी कहा.” उन्होंने कहा कि पुलिस के कहने के बावजूद भीड़ ने ताली बजाना बंद नहीं किया.

गृह मंत्री ने कहा कि इसके बाद कुछ लोग पेड़ पर चढ़े और संभालने की कोशिश में किसान नीचे गिर गया.

सिंह ने कहा, “इसके बाद उसे पुलिस वैन में अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.”

इस दौरान, उन्होंने हालांकि आम आदमी पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं कहा, जिसने किसान की मौत के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है.

उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार और विपक्ष को विश्लेषण करना चाहिए कि आजादी के इतने साल बाद भी किसानों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं आया.

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि क्रमबद्ध लोकप्रिय सरकारें ग्रामीणों और किसानों की स्थिति में सुधार करने में असफल रही है.

दिल्ली में बुधवार को एक किसान द्वारा आत्महत्या करने की वजह से सदन में हंगामे के बीच सिंह ने यह बयान दिया. राजस्थान के दौसा के रहने वाले किसान गजेंद्र सिंह ने आम आदमी पार्टी के भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में बुलाई गई सभा के दौरान पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली थी.

सिंह ने कहा, “मैं सहमत हूं कि मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. किसान की मौत शर्मनाक है.”

उन्होंने कहा, “हम सभी को इन मुद्दों पर सोचना चाहिए. ग्रामीणों और किसानों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हुआ.”

उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1950-51 में भारत की कुल जीडीपी में किसानों का योगदान 55 प्रतिशत रहा, जो घटकर 14 प्रतिशत हो गया. हालांकि, देश की 58 प्रतिशत आबादी अभी भी कृषि में भी संलग्न है.

सिंह ने कहा कि देश की 60 प्रतिशत आबादी को खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में शामिल किया गया है. इससे गांवों में किसानों की व्यथा का पता चलता है.

गृहमंत्री ने कहा कि आत्महत्या मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दी गई है और उसे जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है.

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