राजीव गांधी के हत्यारों पर फैसला सुरक्षित

Tuesday, February 4, 2014

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राजीव गांधी

नई दिल्ली | एजेंसी: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के तीन हत्यारों के मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. मंगलवार को हुई सुनवाई में केंद्र ने इस याचिका का विरोध किया है. दया याचिका को असामान्य रूप से लगभग 11 वर्ष लंबित होने के आधार पर दोषियों ने यह याचिका दायर की थी.

उल्लेखनीय है कि हाल ही में 21 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया था जिसमें कहा गया है कि अनुचित, असामान्य और अस्पष्ट विलंब मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का एक आधार हो सकता है

सुनवाई में इस याचिका पर जवाब देते हुए सरकार ने वी.श्रीहरन उर्फ मुरुगन, पेरारिवलन और संथन की याचिका को खारिज करने का आग्रह किया. सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति के पास 11 वर्षो तक दया याचिका के लंबित रहने के दौरान दोषियों को न किसी तरह की पीड़ा दी गई और न हीं उनके साथ कोई अमानवीय आचरण किया गया.

महान्यायवादी जी.ई.वाहनवती ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.सतशिवम, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की पीठ को बताया कि याचिका को 21 जनवरी के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए,.

वाहनवती ने कहा कि इन 11 वर्षो के दौरान तीनों हत्यारों ने जेल में संगीत समारोह, कला प्रदर्शनी और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन करके जीवन का पूरा आनंद उठाया है.

इस पर न्यायमूर्ति सतशिवम ने कहा, “इसका मतलब है कि वे कट्टर अपराधी नहीं हैं.”

वाहनवती ने कहा कि 26 अप्रैल, 2000 को राष्ट्रपति को दी गई याचिका में भी इन लोगों ने राजीव गांधी की हत्या पर जरा भी पश्चाताप नहीं प्रकट किया है.

तीनों सजा प्राप्त कैदियों की ओर से उपस्थित वरिष्ठ वकील युग चौधरी ने कहा कि विलंब खुद एक अत्याचार है. मुझे अत्याचार को साबित करने की जरूरत नहीं है

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