राहुल गांधी की बात में है दम

Tuesday, January 7, 2014

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राहुल गांधी-कांग्रेस उपाध्यक्ष

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: मुजफ्फनगर दंगों से संबंधित राहुल गांधी की जिस बात को लेकर राजनीतिक गलियारों में हाय तौबा मचा था उसमें दम है. इसका खुलासा मेवात से गिरफ्तार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद शाहिद और राशिद ने की है.

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने एक सभा में कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई दंगा पीड़ितों के संपर्क में है. उस समय यह मांग भी की गई थी कि राहुल गांधी इसके लिये क्षमा याचना मागें क्योंकि उनका कथन दंगा पीड़ितो का अपमान है. भाजपा तथा समाजवादी पार्टी ने राहुल गांधी के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया था.

उस समय किसी ने भी कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बात के मर्म को नहीं समझा था. वास्तव में राहुत गांधी कहना चाह रहे थे कि मुजफ्फरनगर के दंगों का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी बेजा फायदा उठाने के चक्कर में है.

आतंकवादी दंगा पीड़ितो के माध्यम से अपना आधार बढ़ाना चाहते हैं. देश में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिये साम्प्रदायिक दंगों को रोकने की जरूरत है. पुलिस के स्पेशल सेल की माने तो दो दंगा पीड़ित युवक उनकी बातों में आकर तश्कर-ए-तैयबा के संपर्क में आ गये थे. इसके अलावा गिरफ्तार आतंकवादी शाहिद के डायरी में मुजफ्फरनगर के कई युवकों के नाम दर्ज हैं जिसकी जांच की जा रही है.

पुलिस के स्पेशल सेल ने जब दंगा पीड़ितों के शामली कैंप में छापेमारी की तो उस तथ्य का खुलासा हुआ है. हालांकि पुलिस ने उन दोनों युवकों को गिरफ्तार नहीं किया है परन्तु उनको गवाह के रूप में कोर्ट में पेश किया जायेगा.

पुलिस दंगा पीड़ितों के कैंप संचालको के बैंक अकाऊंट की भी जांच कर रही है. आशंका है कि उसमे कोई बड़ा गोलमाल है. राहुल गांधी के बात के दम का खुलासा नहीं हुआ होता यदि हरियाणा के मेवात से आतंकवादियों की गिरफ्तारी नहीं हुई होती.

भाजपा विशेषकर नरेन्द्र मोदी आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी पर ताबड़तोड़ हमले कर रहें हैं. राहुल गांधी के हर बात के बाल की खाल निकाली जा रही है. जिसके नीचे देश की आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों से जुड़े मसले दम तोड़ सकते हैं.

यह सच है कि राहुल गांधी के पास बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है परन्तु युवाओं के हाथों में देश की बागडोर सौंपने की बात करने वालों को एक युवा क्या कह रहा है उस पर अवश्य गौर करना चाहिये, चाहे वह राहुल गांधी ही क्यों न हो.

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