वित्त क्षेत्र के लिए सुपर रेगुलेटर का प्रस्ताव

Sunday, March 24, 2013

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वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले फाइनेंशियल सेक्टर लेजिसलेटिव रिफार्म कमीशन ने वित्तीय क्षेत्र के लिए केवल दो ही नियामक बनाने की सिफारिश की है. आयोग ने कहा है कि बैंकिंग कारोबार को छोड़कर शेष सभी वित्तीय सेवाओं जैसे की बीमा, पेंशन, कमोडिटी आदि को एक सुपर रेग्युलेटर के अंतर्गत लाया जाना चाहिए जबकि रिजर्व बैंक दूसरा नियामक हो सकता है.

वित्त बाजारों के विनियमन पर सुझाव देने के लिए बने इस आयोग के चेयरमैन जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण ने वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें ये सुझाव दिए गए हैं.

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार बीमा क्षेत्र के लिए गठित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा), भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) और फारवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) आदि का काम करीब एक ही जैसा है, ऐसे में उनके लिए अलग-अलग नियामकों का होना तर्कसंगत नहीं है. आयोग का सुझाव है कि इन सभी नियामकों को मिलाकर एक ही नियामक बनना चाहिए जो कि एकीकृत वित्तीय एंजेंसी के तौर पर काम करे.

आयोग ने यह भी सिफारिश दी है कि रिजर्व बैंक दूसरे नियामक के रूप में कार्य कर सकता है जो कि बैंकिंग सेवाओं, मौद्रिक नीति और भुगतान आदि के लिए मौजूदा स्वरूप में ही काम करता रहेगा.

आयोग ने यह भी कहा है कि विदेशी मुद्रा के प्रवाह पर नजर रखने की प्रक्रिया में कई एजेंसियां शामिल होती हैं जैसे डीआईपीपी विभाग, एफआईपीबी, प्रवर्तन निदेशालय और आरबीआई. ऐसे में ये प्रक्रिया जटिल हो जाती है, इसीलिए आयोग ने इस बहुस्तरीय मंजूरी प्रक्रिया को भी कम करने और उसे सरल बनाने की सिफारिश की है

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