थाली की बहस में पड़े फारूख अब्दुल्ला

Friday, July 26, 2013

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एक रुपये की थाली

नई दिल्ली । एजेंसी : योजना आयोग के गरीबी की संख्या में कमी वाले आकड़े प्रस्तुत करने के बाद से ही देश में खाने की कीमत को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है. ताजा हस्तक्षेप यूपीए के घटक नेशनल कांफ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला का है, वे केन्द्रीय मंत्री भी हैं. फारूख अब्दुल्ला ने कहा है कि खाना तो एक रुपये में भी खाया जा सकता है बस इच्छा होनी चाहिये.

फारुख ने दलील देते हुए कहा कि अगर आप चाहते हैं तो अपना पेट भर सकते हैं चाहे एक रुपये में या 100 रुपये में. ये आप पर निर्भर करता है आप क्या खाकर पेट भरते हैं. फारुक ने ये भी कहा कि हम
गरीबों का जीवन स्तर सुधारने की कोशिश में लगे हैं ताकि उन्हें अच्छा भोजना और स्वास्थ्य मिल सके और भारत तरक्की कर सके.

इससे पहले कांग्रेस के राज बब्बर तथा राशिद मसूर ने बयान दिया था कि मुंबई एवं दिल्ली में बारह तथा पांच में भरपेट खाया जा सकता है. भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि केन्द्र सरकार
खतरनाक खेल खेल रही है. योजना आयोग गरीबों की संख्या को कम करके दिखा रहा है.

वास्तव में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह के नेतृत्व में गरीबी की सीमा रेखा तथा प्रति कैलोरी लगने वाले भोजन में कमी कर आकड़ो की बाजीगरी की जा रही है. जिसका विपक्षी दल विरोध कर रहें
हैं. योजना आयोग ने अपने ताजा सर्वेक्षण में तेंदुलकर समिति के सिफारिशों के आधार पर गरीबों की संख्या की गणना की गई है.

विश्व स्तर पर एक मानक तय कर दिया गया है कि गावों में रहने वाले व्यस्क स्त्री एवं पुरूषों को प्रतिदिन 2400 कैलोरी तथा शहर में रहने वाले व्यस्क स्त्री एवं पुरूषों को 2100 कैलोरी का भोजन मिलना चाहिये.

यदि तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट को गहराई से देखा जाए तो पायेंगे कि इस समिति ने मनमुताबिक आंकड़ों को पाने के लिये कैलोरी की चोरी की है. तेंदुलकर समिति ने जिस कैलोरी का उपयोग किया है, वह ग्रामीण क्षेत्रों के लिये 1820 कैलोरी है जो मानक 2400 कैलोरी से 580 कैलोरी कम है. तथा शहरी क्षेत्रों के लिये 1795 कैलोरी का उपयोग किया है जो मानक 2100 कैलोरी से 305 कैलोरी कम है. इस प्रकार कुल 885 कैलोरी की चोरी कर गरीबी की रेखा को कम किया है. हमारे योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहूवालिया वैसे भी आंकड़ों की हेरा फेरी कर वास्तविकता को छुपाने में माहिर हैं.

बहस इस कैलोरी की मात्रा पर होना चाहिये जबकि सभी दल थाली की कीमत को लेकर बहस में कूद पड़े हैं.

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