‘पीके’ को विदेशी नेताओं ने सराहा

Tuesday, January 6, 2015

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फिल्म 'पीके'

काठमांडू | एजेंसी: देश में भले ही ‘पीके’ का विरोध हो रहा है परन्तु इसे पड़ोसी नेपाल के नेताओं ने सराहा है. नेपाल की दो सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टियों के नेताओं ने आपसी संबंधों को ठीक करने के मकसद से फिल्म ‘पीके’ साथ-साथ देखी. नेपाल के नए संविधान का मसौदा तैयार किए जाने की आखिरी तारीख से पहले दोनों पाटियों का ‘पीके’ के बहाने करीब आना एक अच्छा संकेत है.

फिल्म देखने वाले नेताओं में सीपीएन-यूएमएल के उपाध्यक्ष व उपप्रधानमंत्री बामदेव गौतम और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के अलावा माओवादी नेता पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ भी शामिल थे.

रिपोर्टों की मानें तो ये इवेंट शांतिपूर्ण रहा. फिल्म देखने से पहले तीनों नेताओं ने नाश्ते पर बैठक भी की. बामदेव गौतम ने फिल्म के टिकट खरीदे. इससे पहले नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और माओवादी नेता बाबूराम भट्टाराई ने भी ‘पीके’ देखी थी.

‘पीके’ के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “अंधविश्वास, शोषण और पाखंडवाद जैसी सामाजिक बुराइयों की नजर से ‘पीके’ एक सफल फिल्म है. ये हमें सामाजिक न्याय का संदेश देती है.”

नेपाल के पुनर्निर्माण पर दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के मतभेदों को देखते हुए भारत में इस कदम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नेपाल के नए संविधान का मसौदा तैयार किए जाते वक्त दोनों पार्टियों के सर्वोच्च नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों के कारण दोनों पार्टियों का करीब आना एक नई शुरुआत मानी जा सकती है.

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