बीपीएल ज़मीन खरीदी में सरकार को नोटिस

Wednesday, January 1, 2014

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर | संवाददाता: बीपीएल आदिवासियों के नाम पर करोड़ों रुपये की ज़मीन खरीदने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायगढ़ के पुसौर में बन रहे कोरबा वेस्ट कंपनी पावर लिमिटेड समेत राज्य शासन को नोटिस जारी किया है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यतीन्द्र सिंह ने पत्रकार आलोक प्रकाश पुतुल और सामाजिक कार्यकर्ता विनोद व्यास की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये यह आदेश दिया है.

गौरतलब है कि रायगढ़ के पुसौर में उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाली अवंथा ग्रुप की सहयोगी संस्था कोरबा वेस्ट पावर कंपनी लिमिटेड 600-600 मेगावाट के पॉवर प्लांट बना रही है. पुसौर ब्लाक के ग्राम बड़े भंडार, छोटे भंडार, सरवानी और अमलीभौना में प्रस्तावित 600-600 मेगावाट के 5826 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पॉवर प्लांट के लिये कंपनी को 885.12 एकड़ जमीन की जरुरत थी.

याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ की भू-राजस्व संहिता की धारा 170 ख के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र एवं अनुसूचित जनजातियों की भूमि को गैर आदिवासी द्वारा अंतरण नहीं किया जा सकता. ऐसे में कोरबा वेस्ट पावर लिमिटेड ने इसके लिये सरकारी अधिकारियों की मदद से पहले जमीनों का चिन्हांकन करवाया और फिर आदिवासियों की जमीन खरीदने के लिये 300 किलोमीटर दूर रायपुर जिले के अभनपुर के परसदा गांव के आदिवासियों को मोहरा बनाया

याचिका में कहा गया है कि इस गांव के आठ आदिवासियों ने अपने नाम से 100 आदिवासियों की जमीनें खरीदीं. इन आदिवासियों में से सभी का नाम रोजगार गारंटी योजना में दर्ज है और इनका परिवार रोजगार गारंटी योजना में मजदूरी भी करता रहा है. सभी आदिवासी बीपीएल कार्डधारी हैं और इन बीपीएल कार्डधारियों ने महीने भर के भीतर 10 करोड़ 26 लाख 66 हजार 427 रुपये की ज़मीन खरीदी है.

इस जनहित याचिका में कहा गया है कि फर्जी तरीके से आदिवासियों की ज़मीन खरीदी गई, जिससे उन्हें न तो विधिसम्मत मुआवजा मिला और ना ही नियमानुसार नौकरी और दूसरी विस्थापन संबंधी सुविधायें ही मिली. फर्जी तरीके से ज़मीन खरीदे जाने के मामले में पुसौर के आदिवासियों ने राज्य के सभी आला अधिकारियों से लिखित गुहार लगाई लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई.

याचिकाकर्ता आलोक प्रकाश पुतुल ने बताया कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्टिंग की. इसके बाद आदिवासी लगातार उनके पास इस समस्या में मदद मांगने आते रहे. जब कहीं से इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने नैतिक दायित्व निभाते हुये इस मामले में अधिवक्ता रजनी सोरेन और किशोर नारायण के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है.

आज मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यतींद्र सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुये कोरबा वेस्ट पावर कंपनी लिमिटेड, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़, राजस्व सचिव, संभागआयुक्त बिलासपुर, कलेक्टर रायगढ़, एसडीओ पुसौर और उप पंजियक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिये हैं.

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