नवाज़ कश्मीरी अलगाववादी से बात जारी रखेंगे

Friday, November 21, 2014

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नवाज़ शरीफ़-पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

इस्लामाबाद | समाचार डेस्क: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का दोहरा चेहरा बेनकाब हो गया है. नवाज़ ने पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुरादाबाद में कश्मीर परिषद के संबोधन में अजब बात कही है. एक ओर तो वह कश्मीरी अलगाववादी नेताओँ से बात जारी रखना चाहते है, दूसरी ओर भारत के साथ शांति वार्ता भी करना चाहते हैं. गौरतलब है कि नेपाल में दक्षेस देशों का सम्मेलन होने वाला है जहां भारत तथा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भाग लेने वाले हैं. दक्षेस सम्मेलन के पहले पाक प्रधानमंत्री के इस दोहरे रिख से साफ है कि उनकी मंशा न तो शांति वार्ता करने में है और न ही वह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से बाज आने वाले हैं. नवाज़ शरीफ़ ने कश्मीर परिषद को अपने संबोधन में कहा, “भारत के साथ बातचीत शुरू करने से पहले मैंने कश्मीरी नेताओं के साथ विचार-विमर्श करने का फैसला किया है.”

शरीफ ने कश्मीर परिषद में कहा कि पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पर सीमा पार से हाल में भारतीय सैनिकों द्वारा बिना उकसावे के की गई गोलीबारी का कड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि भारत की गोलीबारी ने विश्वास बहाल करने के उपायों को नुकसान पहुंचाया. शरीफ ने कहा कि उनकी सरकार सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा सहित हर मंच पर कश्मीर के मुद्दे को सक्रियता से उठा रही है. उन्होंने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर चिंता जताई और उनसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों तथा कश्मीर की जनता की आकांक्षाओं के अनुसार समस्या के हल की दिशा में पहल करने का अनुरोध किया.

नवाज ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने कश्मीर मुद्दे के संबंध में हमेशा अपनी पारंपरिक हठ दिखाया है. उन्होंने कहा कि कश्मीरियों के संघर्ष को आंतकवाद बताना भारत का गलत रुख है, क्योंकि यह आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए संघर्ष है. शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ जंग में बहुत ‘त्याग’ कर रहा है.

गौरतलब है कि इससे भारत में पाकिस्तान के उच्चयुक्त अब्दुल बासित द्वारा कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को अपने दिल्ली आवास में बुलाकर बात जारी रखी थी जिस कारण से भारत ने पाकिस्तान के साथ होने वाली सचिव स्तर की शांति वार्ता को स्थगित कर दिया था. जाहिर है कि नये परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा कश्मीर में जनमत संग्रह न कराये जाने से पाकिस्तानी नेता तथा वहां के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के लिये कश्मीर के मुद्दे को जिंदा रखा पाना असंभव होता जा रहा है. इसी कारण से नवाज़ शरीफ़ पाक अधिकृत कश्मीर में जाकर कश्मीर की पुराना राग अलाप रहें हैं.

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