Video: बेटी के शव लेकर चला पिता

Saturday, September 3, 2016

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बेटी का शव

मलकानगिरी | समाचार डेस्क: ओडिशा में एक पिता को अपनी बेटी के शव के लेकर पैदल चलना पड़ा. अभी कालाहांडी के दाना माझी द्वारा अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लेकर चलने की घटना शांत ही नहीं हुई थी कि मलकानगिरी में एक मजबूर पिता को अपनी साल साल की बेटी के शव को लेकर 6 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा. दरअसल, लड़की की अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही मौत हो गई थी जिसके बाद एंबुलेंस के ड्राइवर ने उन्हें गाड़ी से उतार दिया. इसके बाद मजबूर पिता को अपने बेटी के शव को लेकर पैदल चलना पड़ा.

मलकानगिरी के घुसापल्‍ली की रहने वाली बरसा खेमुडू की मौत तब हो गई जब उसके माता-पिता उसे मिथाली अस्‍पताल से एंबुलेंस के जरिये मलकानगिरी जिला अस्‍पताल ले जा रहे थे. बरसा की हालत खराब होने के बाद उसे मिथाली अस्‍पताल से जिला अस्‍पताल रेफर किया गया था.

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एंबुलेंस के ड्राइवर ने ही तय कर लिया कि बच्ची की मौत हो गई है जबकि केवल डॉक्टर ही मृत्यु की घोषणा कर सकते हैं.

लड़की के पिता दीनाबंधु खेमुडू ने बताया, “जैसे ही ड्राइवर को पता चला कि हमारी बेटी की मौत रास्‍ते में ही हो गई है, उसने हमसे एंबुलेंस से उतर जाने को कहा.”

मामला तब प्रकाश में आया जब स्‍थानीय लोगों ने खेमुडू और उसकी पत्‍नी को बेटी का शव लेकर पैदल चलते देखा और उसके बारे में पूछा. इसके बाद गांव वालों ने स्‍थानीय बीडीओ और चिकित्‍सा अधिकारियों से संपर्क किया तब जाकर दूसरी गाड़ी का इंतजाम हो पाया.

हालांकि मलकानगिरी के जिला कलेक्‍टर के सुदर्शन चक्रवर्ती ने मुख्‍य जिला चिकित्‍सा अधिकारी उदय शंकर मिश्रा को मामले की जांच करने को कहा है. सीडीएमओ ने मलकानगिरी पुलिस थाने में ड्राइवर के साथ ही एंबुलेंस में मौजूद फार्मासिस्‍ट और अटेंडेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.

चक्रवर्ती ने पत्रकारों से कहा, यह पूरी तरह से गैरकानूनी है और ड्राइवर की तरफ से आपराधिक लापरवाही की गई है. मामले में जिम्‍मेदार लोगों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही उन्‍होंने कहा कि जिला प्रशासन ने लड़की के माता-पिता को तत्‍काल वित्तीय सहायता मुहैया कराई है.

जब सीडीएमओ उदय मिश्रा से संपर्क किया गया तो उन्‍होंने इस कृत्‍य को ‘अमानवीय’ करार देते हुए कहा, “जैसे ही मुझे घटना का पता चला, मैंने तुरंत ही दूसरी गाड़ी भेजी जिसने लड़की के परिवार वालों को उनके गांव पहुंचाया.”

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