क्या अमरीका महाशक्ति नहीं रहा?

Saturday, August 2, 2014

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बराक ओबामा

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: बकौल राष्ट्रपति ओबामा अमरीका दुनिया भर में सब कुछ नियंत्रित नहीं करता है. गौरतलब है कि यूक्रेन और गाज़ा संकट पर पूछे गये सवाल के जवाब में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा ‘‘लगता है कि लोग भूल गए हैं कि पृथ्वी का सर्वाधिक शक्तिशाली देश अमरीका अब भी दुनिया भर में सब कुछ नियंत्रित नहीं करता.’’ अमरीकी राष्ट्रपति के इस ताजा बयान के दो निहितार्थ है.

पहले शीत युद्ध के दौर में भी अमरीका के नियंत्रण में सब कुछ नहीं था दूसरा, सोवियत संघ के पतन के बाद दुनिया का एक ध्रुवीय हो जाने के बाद भी रशिया, अमरीका के लिये सीमित तौर पर चुनौती बना हुआ है.

ओबामा की यह झल्लाहट उनके इस बयान से साफ झलकती है जिसमें उन्होंने यूक्रेन तथा गाज़ा में जारी संकट पर कहा है ‘‘अक्सर हमारे कूटनीतिक प्रयासों में समय लगता है. अक्सर उनमें प्रगति होगी और फिर एक कदम पीछे भी हो जाएगा. मध्य पूर्व, यूरोप, एशिया में यह हकीकत है. यह वैश्विक मामलों की प्रकृति है.’’ ओबामा ने संवाददाताओं से आगे कहा ‘‘लेकिन अगर आप देखें, तो यूक्रेन के लिए हमने जो भी कहा था वह हमने किया है लेकिन हम यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि पुतिन कैसे सोचते हैं.’’

ज्ञात्वय रहे कि शीत युद्ध के दौर में सोवियत संघ, अमरीका की विदेश नीति को लागू करने में रुकावटे डालता था. ओबामा के ताजा बयान से जाहिर है कि अब भी रशिया, अमरीकी विदेश नाति को लागू करने से रोक रहा है वर्ना अमरीका की चले तो फिलिस्तीन का नामों निशान मिटा दे. इसके अलावा अमरीका यूक्रेन में सीधे हस्तक्षेप करने की हालात में भी नहीं है.

इसी कारण ओबामा पुतिन की ओर संकेत कर कहते हैं, ‘‘हम पुतिन को आगाह कर सकते हैं कि यदि उन्होंने उन सशस्त्र अलगाववादियों का साथ देना जारी रखा जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं और यूक्रेन की भूभागीय एकता तथा संप्रभुता को कमजोर करते हैं, तो उन्हें इसके गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा जिससे उनका देश भी प्रभावित होगा.’’

बेशक, अमरीका की सामरिक शक्ति बेजोड़ है तथा विश्व व्यापार पर उसका अपने साथी देशों के साथ दादागिरी चलती है. अमरीका, पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन को मार सकता है परन्तु यूक्रेन में विद्रोहियों द्वारा मलेशिया के विमान को मार गिराये जाने के बाद वह थोथी बयानबाजी के अलावा और कुछ करने में नाकाम है.

इससे सवाल खड़ा होता है क्या अमरीका कागज का शेर है जो व्हाइट हाऊस, लैंग्ली तथा पेंटागन में बैठकर दहाड़ता रहता है. यदि अमरीका सब कुठ नियंत्रित नहीं कर सकता तो महाशक्ति कहना बंद कर देना चाहिये.

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