विजय माल्या हाजिर हो।

Monday, April 18, 2016

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आदेश

मुंबई | समाचार डेस्क: विजय माल्या के खिलाफ़ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया है. जाहिर है कि इससे विजय माल्या को गिरफ्तार कर भारत लाने का रास्ता खुल गया है. प्रवर्तन निदेशालय की तत्परता के चलते विजय माल्या के खिलाफ़ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है. हजारों करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाने के मामले में फंसे उद्योगपति विजय माल्या के खिलाफ यहां एक विशेष अदालत ने सोमवार को गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. यह जानकारी यहां आधिकारिक सूत्रों ने जाहिर की है. विशेष न्यायाधीश पी.आर. भावके ने प्रीवेंशन ऑफ मनी लाउंडरिंग अधिनियम के तहत माल्या के विरुद्ध मामले की सुनवाई करते हुए गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया.

प्रवर्तन निदेशालय ने 15 अप्रैल को विशेष अदालत में माल्या के विरुद्ध वारंट जारी करने के लिए याचिका दाखिल की थी. माल्या दो मार्च से विदेश में हैं.

इस वारंट के बाद इंटरपोल के लिए माल्या के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का रास्ता साफ हो गया है. इसके साथ ही माल्या को देश में भी कहीं भी और किसी भी वक्त गिरफ्तार किया जा सकता है.

विशेष अदालत ने माल्या के वकीलों अमित देसाई और प्रणब बधेकर के इस तर्क को खारिज कर दिया कि बंद हो चुकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस के अधिकारीगण प्रवर्तन निदेशालय के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और उन्हें भगोड़ा या असहयोगी नहीं कहा जाना चाहिए.

माल्या के वकीलों ने निदेशालय के इस आरोप को गलत बताया कि माल्या ने कर्ज का उपयोग विदेशी संपत्ति में निवेश करने में किया. उन्होंने विशेष अदालत से अनुरोध किया कि निदेशालय की मांग के मुताबिक इस मामले में माल्या के विरुद्ध सख्त आदेश जारी न करें.

निदेशालय के वकील हितेन वेनगांवकर ने सोमवार को अदालत से कहा कि माल्या को निश्चित रूप से खुद को निदेशालय के समक्ष पेश करना चाहिए, जिसने इससे पहले उनके खिलाफ दर्ज काले धन की हेराफेरी मामले में उन्हें तीन बार समन भेजा है.

निदेशालय ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ होने की भी आशंका जाहिर की.

प्रवर्तन निदेशालय ने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज नहीं चुकाने और काले धन की हेराफेरी के मामले में माल्या को तीन बार सम्मन किया, लेकिन माल्या उसके सामने उपस्थित नहीं हुए.

18 मार्च, दो अप्रैल और नौ अप्रैल को निदेशालय के सामने उपस्थित नहीं होने के बाद माल्या ने निदेशालय से मई तक का और समय मांगा है.

उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल को ही केंद्र सरकार ने माल्या का राजनयिक पासपोर्ट निलंबित कर दिया है.

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