बिजली की कमी पर कोयले का झूठ

Tuesday, July 22, 2014

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कोयला

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में पर्याप्त कोयला है और एनटीपीसी इस मामले में झूठ गढ़ रहा है. एनटीपीसी के अफसरान दिल्ली में बैठ कर कम कोयले की बात कह रहे हैं, जबकि इसके उलट हकीकत ये है कि छत्तीसगढ़ में एनटीपीसी सीपत और कोरबा, दोनों ही कोल इंडिया के उपक्रम एसईसीएल की खदानों से कोयला उठा ही नहीं रहे हैं. इधर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी कई बार कहा है कि छत्तीसगढ़ में कोयले की कमी नहीं है और बिजली उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा है.

मुख्यमंत्री ने साफ कहा था कि कोयले का पर्याप्त भंडार है, बिजली उत्पादन जारी है, प्रदेश में बिजली संकट की आशंका निर्मूल है. मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह और ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव अमन सिंह कोयले की कमी से इनकार करते रहे हैं.

दूसरी ओर साउथ ईस्ट कोलफिल्ड लिमिटेड यानी एसईसीएल का कहना है कि उनके पास कोयले का पर्याप्त भंडार है और एनटीपीसी द्वारा कोयले को उठाया नहीं जा रहा है. एसईसीएल के कोरबा के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुमार के अनुसार विद्युत उत्पादन करने वाली कंपनियां कोयले का पर्याप्त उठाव नहीं कर पा रही है तथा कोयला संकट की बात कर रही है.

एसईसीएल के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुमार के अनुसार प्रतिदिन 13 हजार टन कोयले का उत्पादन एसईसीएल मानिकपुर में किया जा रहा है. इसके बावजूद सुविधा का अभाव बताकर सीएसईबी केवल 6 हजार टन कोयले का ही उठाव प्रतिदिन कर रहा है.

इसी तरह से एनटीपीसी को कोयला देने वाली एसईसीएल गेवरा के प्रबंधक एके उदनिया का कहना है कि गेवरा क्षेत्र में कोयले का कोई संकट नहीं नहीं है. श्री उदानिया की मानें तो गेवरा में 99 हजार टन कोयले के उत्पादन का लक्ष्य प्रतिदिन पूरा किया जा रहा है. एनटीपीसी को प्रतिदिन 35 हजार टन कोयला दिया जा रहा है. जबकि एनटीपीसी केवल 25-25 हजार टन कोयला ही उठा रहा है.

समाजवादी नेता आनंद मिश्रा का कहना है कि देश में बिजली की कमी का हौव्वा खड़ा करके आम जनमानस में यह धारणा बनाने की कोशिश हो रही है कि जंगलों को काट कर और आदिवासियों को विस्थापित करके बिजली संयंत्रों के लिये कोयला खनन जरुरी है. आनंद मिश्रा ने कहा कि बिजली का कृत्रिम संकट दिखा कर निजी कंपनियों को कोल ब्लॉक का आवंटन करने और इसी की आड़ में पंचायत कानून को कमज़ोर करने की कोशिश की साजिश रची जा रही है.

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