मलेरिया की नई उपचार विधि

Tuesday, December 24, 2013

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संक्रमित मच्छर

लंदन | एजेंसी: वह दिन दूर नहीं जब मलेरिया से मरने वालों की संख्या शून्य हो जायेगी. एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रति वर्ष करीब 40,000 लोग मलेरिया से मारे जाते हैं. पूरी दुनिया में मलेरिया के उपचार में असफलताओं की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है.

इससे चिंतित वैज्ञानिकों ने रोगी के शरीर में मलेरिया फैलाने वाले परजीवियों को बढ़ने से रोकने की एक नई विधि ईजाद की है. मलेरिया की रोकथाम के लिए ईजाद इस नई उपचार विधि ने पूरी दुनिया में मलेरिया निदान की दिशा में नई उम्मीदें जगाई हैं.

लंदन के इंपीरियल कॉलेज में रसायनशास्त्र विभाग के वैज्ञानिकों के एक दल ने एड टेट के नेतृत्व में इस नई मलेरिया रोकथाम विधि की खोज की है. अध्ययन के मुताबिक, मलेरिया फैलाने वाले सबसे आम परजीवी प्लाज्मोडियम फाल्सिपारम में पाए जाने वाले एनएमटी नामक एंजाइम की गतिविधि को रोकने से चूहों में मलेरिया के लक्षण समाप्त हो गए. इसके बाद चूहों की उम्र भी बढ़ गई.

टेट ने अपने अध्ययन में कहा है, “मलेरिया में प्रभावी भूमिका अदा करने वाले एक एंजाइम की खोज बहुत बड़ी उपलब्धि हो सकती है. हमने अपने अध्ययन में पाया कि मलेरिया संक्रमण के दौरान कई तरह की गतिविधियों में एनएमटी की बहुत बड़ी भूमिका होती है. हम अपने शोध में एनएमटी की गतिविधि को रोक सकने में सहायक अणुओं को विकसित करने में भी सफल रहे.”

वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि यह उपचार न सिर्फ प्लाज्मोडियम फाल्सिपारम, बल्कि अन्य मलेरिया परजीवियों पर प्रभावी होगा.

टेट का यह शोधपत्र रसायन विज्ञान की प्रख्यात शोध पत्रिका ‘नेचर केमिस्ट्री’ में के ताजा संस्करण में प्रकाशित हुआ है.

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