म्यांमार दे रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिकता: मून

Thursday, July 11, 2013

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बान की मून

यांगून: संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि यदि म्यांमार को एक विश्वसनीय देश के रूप में स्थापित होना है तो सबसे पहले उसे अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिकता देनी होगी. गौरतलब है कि देश के पश्चिमी इलाके में रोहिंग्या मुसलमानों और बहुसंख्यक बौद्धों के बीच पिछले कई महीनों से हिंसक झड़पों का दौर जारी है.

दरअसल म्यांमार के सैन्य शासक ये मानते हैं कि रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार के मूल निवासी नहीं है और ब्रिटिश शासन के दौरान इन्हें बांग्लादेश से लाया गया था. इसी वजह से उन्हें पहली दी गई नागरिकता छीनकर उन पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे जिसमें दो बच्चों वाली नीति भी शामिल है जिसकी मानवाधिकार संगठनों ने काफी आलोचना की है.

बान की मून ने कहा है कि म्यांमार प्रशासन को और रोहिंग्या मुस्लिमों की तकलीफों को समझना होगा और उनकी बेहतरी के लिए समुचित कदम उठाने होंगे. उन्होंने कहा कि अगर म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों की नागरिकता की मांग पूरी नहीं करता तो इससे सुधार की प्रक्रिया में बाधा पहुंचेगी और क्षेत्र में नकारात्मक भावनाएं भड़केंगी.

उल्लेखनीय है कि पिछले एक साल के अंदर रोहिंग्या मुसलमानों पर हुए अत्याचारों में सैकड़ों लोगों की जानें चली गई हैं और एक लाख चालीस हज़ार से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए हैं.

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