बाल श्रवण योजना का बहरापन

Friday, January 24, 2014

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कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ के कोरबा में बाल श्रवण योजना के तहत 3 वर्षो में केवल 18 बच्चों को इसका लाभ मिल पाया है. जन्मजात बाधिरता एवं छोटे बच्चों में बाधिरता से होने वाले दुष्प्रभाव को कम करने तथा उनमें भाषा एवं वाणी का विकास करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना संचालित है. जिले में मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना में सन्नाटा पसरा हुआ है. इसके पीछे योजना का प्रचार प्रसार सही तरीके से नहीं हो पाना है.

वहीं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण भी जन्मजात बाधिरता वाले बच्चे सुन पाने के वरदान से वंचित हो रहे हैं. बहरापन से पीडि़त एक 1 से 7 वर्ष तक के बच्चों को इस योजना के तहत् निशुल्क लाभ दिलाया जाता है जिसमें में बीपीएल व सामान्य दोनों श्रेणी के बच्चे लाभ प्राप्त कर सकते हैं. श्रवण बाधित बच्चे के कान के भीतर क्वाक्लियर मशीन लगायी जाती है. यह काफी महंगा ऑपरेशन हैं.

राज्य शासन द्वारा बीपीएल परिवार के लिए छ: लाख एवं सामान्य परिवारों के बच्चों के लिए चार लाख रूपये की सहायता राशि स्वीकृत की जाती है. जिले में इस योजना का बुरा हाल है. जिला अस्पताल के माध्यम से वर्ष 2011 से इस योजना के तहत् बच्चों का चिन्हांकन कार्य जारी है. इन तीन वर्षों में महज जिले के 18 बच्चों को ही इसका लाभ मिल सका है.

वर्ष 2011 में चार और वर्ष 2012 में केवल छ: 2013 में 8 बच्चे ही योजना के तहत्ï लाभ प्राप्त कर सके हैं. जबकि 2014 में अब तक योजना का लाभ किसी को नहीं मिला है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को इस योजना के संचालन का दायित्व दिया गया है. लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा योजना के प्रचार प्रसार में कोताही बरती जा रही है. जिसका खामियाजा बाधिर बच्चे उठा रहे हैं.

शासन स्वास्थ्य पर आधारित जन कल्याणकारी योजनाओं पर पानी की तरह पैसे बहा रही है. लेकिन स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता इस योजना के आड़े आ रही है. यही कारण है कि जिले के न सुन पाने वाले बच्चों को पुन: सुन पाने का शासकीय वरदान नहीं मिल पा रहा है. यह योजना सभी वर्गों के लिए है. इसके बावजूद क्रियान्वयन में हो रही लापरवाही हजारों बच्चों के बाधिरता उन्मूलन में बाधक बनी हुई है.

क्या है मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना

जन्मजात बाधिरता एवं छोटे बच्चों में बाधिरता दूर करने तथा भाषा एवं वाणी का विकास करना मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना का उद्देश्य है. इस योजना के तहत् बीपीएल एवं सामान्य दोनों श्रेणी के एक से सात वर्ष तक के बच्चों का निशुल्क ऑपरेशन किया जाता है. राज्य शासन द्वारा इस योजना के तहत्ï बीपीएल परिवार के बच्चों के लिए छ: लाख एवं सामान्य परिवार के लिए चार लाख रूपये की सहायता राशि स्वीकृत की जाती है.

आवेदन प्रक्रिया

इस योजना के तहत् आवेदन प्रक्रिया संपादित की जाती है. बच्चे में श्रवण बाधिता की पुष्टि होने के बाद आवेदन पत्र सिविल सर्जन के माध्यम से राज्य नोडल अधिकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सामने प्रस्तुत होता है. आवेदन पत्र के साथ सर्जरी की अनुशंसा होती है. इस योजना के लिए आवेदन पत्र जिला चिकित्सालय, राज्य नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संचालनालय रायपुर तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर रायपुर के क्वाक्लियर इंप्लांट केन्द्र से प्राप्त किये जा सकते हैं.

योजना से अंजान हैं लोग विभाग द्वारा योजना का सही ढंग से प्रचार प्रसार नहीं किये जाने के कारण लोग इस योजना से अंजान हैं. प्रचार का आभाव और लोगों की अनभिज्ञता हजारों बच्चों के बाधिरता उन्मूलन में बाधक साबित हो रहा है.

योजना के क्रियान्वयन व संचालन के लिए शासन द्वारा हजारों लाखों रूपये अनुमोदित किया जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी योजना का प्रचार उस हिसाब से नहीं हो रहा है जिस गति से होना चाहिए. शहरी क्षेत्र के लोग भी इस योजना से अंजान हैं तो भला ग्रामीण अंचलों में इसकी क्या स्थिति होगी आप सभी वाकिफ है.

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