भाजपा अपनी सरकार के फैसले से नाखुश

Tuesday, January 7, 2014

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शिवराज सिंह चौहान

भोपाल | एजेंसी: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य में शराब की एक भी नई दुकान न खोलने का ऐलान लगातार करते रहे हैं, मगर नई आबकारी नीति में देसी शराब की दुकान पर विदेशी शराब बेचने के प्रावधान पर सरकार के कई मंत्रियों सहित भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं. उनकी ओर से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठने लगी है.

राज्य मंत्रिपरिषद की सोमवार को हुई बैठक में नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी गई है. इस नीति में देशी शराब की दुकान के साथ विदेशी शराब बेचने का प्रावधान किया गया है. जब यह मसौदा मंजूर किया जा रहा था, तब सरकार के तीन प्रमुख मंत्रियों गृहमंत्री बाबूलाल गौर, पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव और वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने सवाल उठाए और कहा कि यह निर्णय हमारे लिए ठीक नहीं है तथा जनता के बीच भी अच्छा संदेश नहीं जाएगा.

एक तरफ जहां मंत्रिपरिषद की बैठक में मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के फैसले पर एतराज जताया था तो अब बाहर पार्टी के नेता भी पुनर्विचार की मांग करने लगे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रहलाद पटेल ने मंगलवार को कहा कि वे स्वयं इस फैसले के खिलाफ हैं और सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए.

उनका मानना है कि सरकार के इस निर्णय से उन लोगों को मुसीबत का सामना करना होगा जो शराब बंदी के लिए आंदोलन चलाए हुए हैं.

पटेल से ही मिलती-जुलती राय सांसद रघुनंदन शर्मा की है. वे कहते हैं कि सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. दूसरी ओर, सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया व माया सिंह ने सरकार के फैसले को सही ठहराया है. उनका कहना है कि सरकार नई शराब दुकान न खोलने के अपने वादे पर कायम है.

वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि शिवराज सिंह चौहान की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है. उन्होंने शराब दुकान न खोलने का ऐलान किया था और देसी की दुकान पर विदेशी शराब बेचने का फैसला लिया है, इससे यह साफ हो गया है कि उनकी कथनी और करनी अलग है.

देसी शराब की दुकान पर विदेशी शराब बेचने के फैसले पर पहले सरकार के ही मंत्रियों द्वारा और अब पार्टी के जिम्मेदार लोगों द्वारा सरकार पर उंगली उठाए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री भले ही फैसला वापस न लें मगर सफाई तो देना ही होगी. ऐसा नहीं हुआ तो विरोधियों और शराब के खिलाफ आंदोलन करने वालों को हमले का मौका मिल जाएगा.

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