मोनेट की ग्रामसभा के लिए बंद कमरे में बैठक

Thursday, March 7, 2013

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मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड

कोरबा: मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड को रजगामार में आबंटित अंडर ग्राउंड कोयला खदान दिये जाने के संबंध में ग्राम सभा के पूर्व आज रजगामार पंचायत भवन के एक बंद कमरे में एक घंटे तक बैठक चली. बैठक में एसडीएम जीआर राठौर, मोनेट के माईनिंग इंचार्ज एन एम ओझा व अधिकारियों के अलावा गांव के सरपंच व पंच उपस्थित थे. बैठक को लेकर ग्रामीणों ने अपना विरोध जताया. बैठक स्थल पर प्रभावित चार गांवों के ग्रामीण काफी संख्या में मौजूद थे.

केंद्र सरकार द्वारा रजगामार के फुल्काडीह नाला के दक्षिण में मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड तथा टॉपवर्थ स्टील लिमिटेड को अंडर ग्राउंड कोल ब्लाक आबंटित किया गया है. इसमें मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड की 80.9 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. इस अंडर ग्राउंड कोल ब्लॉक के लिए आबंटित जमीन में 62 एकड़ जमीन ग्रामीणों की, 17 एकड़ राजस्व व 923 एकड़ वन भूमि शामिल है.

कोयला खदान की शुरुवात के बाद पांच राजस्व ग्राम ढेंगुरडीह, केरवा, कोरकोमा, केराकछार व रजगामार प्रभावित होंगे. जिनमें से रजगामार को छोडक़र शेष गांव में ग्राम सभा के माध्यम से खदान प्रदान करने की स्वीकृति दे दी है. रजगामार ग्राम पंचायत में मोनेट प्रबंधन व प्रशासन को ग्राम सभा में उक्त प्रक्रिया के लिए कोरम नहीं मिल रहा है. इस कारण तीन बार रजगामार में ग्राम सभा सफल नहीं हो सकी है.

एक ओर जहां ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं मोनेट प्रबंधन व प्रशासन द्वारा ग्राम सभा में कोरम को पूरा करने का प्रयास जारी है. इसी कड़ी में आज पंचायत भवन के एक बंद कमरे में एसडीएम, मोनेट अधिकारी व पंच-सरपंच की बैठक आहूत की गयी थी, बंद कमरे में एक घंटे तक चली. जिसका ग्रामीणों ने जमकर विरोध जताया. विरोध के दौरान प्रभावित चार ग्रामों के ग्रामीण काफी संख्या में मौजूद थे.

जिन गांवों में ग्राम सभा के माध्यम से कोल ब्लाक को स्वीकृति मिल चुकी है, उन गांवों के ग्रामीण भी खुद के साथ हुई धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए बैठक स्थल के बाहर डटे हुए थे. ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी ने उन्हें धोखे में रखकर उनकी जमीन हथिया ली है, जिसका वे विरोध करने पहुंचे हैं. बैठक में हुए विरोध को देखते हुए लगता नहीं है कि रजगामार में मोनेट की राह आसान होगी.

रजगामार में दो बार बेनतीजा रही है ग्राम सभा
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए रजगामार में आयोजित गत 11 जनवरी व 17 फरवरी की ग्राम सभा की बैठक बेनतीजा रही थी. तीसरी बार पुन: ग्राम सभा आयोजित होनी है जिससे पूर्व आज एक बैठक की गयी. बैठक का ही ग्रामीणों ने विरोध किया है. जिले में पेशा कानून लागू होने के कारण ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है.

ग्रामीणों ने घेरा एसडीएम को
बैठक समाप्त होने के बाद जैसे ही एसडीएम जी आर राठौर बंद कमरे से बाहर निकले, वैसे ही बैठक भवन के बाहर एकत्रित ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और सवाल किया कि जब वे जमीन नहीं देना चाहते तो फिर किसलिये बैठक की गयी है. ग्रामीणों का कहना था कि जिनकी जमीन ली जानी है, उन्हें ही बैठक से बाहर क्यों रखा गया. एसडीएम जी आर राठौर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि रजगामार में आयोजित ग्राम सभा के लिए तिथि निर्धारण के लिए बैठक आयोजित थी, जो अगले माह के 7-10 को आयोजित की जा सकती है.

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