ऐसे स्कूल में कैसा भाषण

Friday, September 5, 2014

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शिक्षक दिवस और स्कूल

बिलासपुर | संवाददाता: पीएम मोदी जी का भाषण छत्तीसगढ़ के अंधिकांश स्कूली बच्चे नहीं देख पाएंगे क्योंकि राज्य के 59 फीसदी स्कूलों में टीवी की कौन कहे, बिजली ही नहीं है. कुल 61 हज़ार स्कूलों में से केवल 41.4 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली है. वैसे भी देश भर के केवल 49.9 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली की सुविधा है.

कहानी तो कई हैं लेकिन आपको लिये चलते हैं हम आपको बगधरा. बिलासपुर से कोई 80 किलोमीटर दूर है खोंगसरा और फिर वहां से नदी को पार कर लगभग 20 किलोमीटर दूर पहाड़ी चढ़ाई कर किसी तरह बैगा आदिवासी बहुल गांव बगधरा पहुंचा जा सकता है.

इलाके में लगातार बारिश हो रही है, इसलिये गांव के सरकारी स्कूल के एकमात्र शिक्षक विनोद साव कभी स्कूल आते हैं तो कभी नहीं आ पाते हैं. बच्चे हर दिन मध्यान्ह भोजन के कारण ज़रुर स्कूल पहुंच जाते हैं.

यूं तो शिक्षक विनोद साव की नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय में हुई है लेकिन गांव के माध्यमिक विद्यालय का जिम्मा भी उन पर ही है क्योंकि 2006 के बाद से माध्यमिक विद्यालय में आज तक किसी शिक्षक की नियुक्ति हुई ही नहीं.

स्कूल में बिजली नहीं है लेकिन कोई दो दर्जन बच्चों की संख्या वाले इस स्कूल में दो शौचालय पहले ही थे, एक और बन कर तैयार हो रहा है.

शिक्षक विनोद साव से हमारी बातचीत फोन से हुई तो उन्होंने बताया- “कल प्रधानमंत्री जी के भाषण के लिये रेडियो का जुगाड़ कर रहा हूं. फिर सुबह-सुबह जल्दी पहुंचुंगा, जिससे बच्चों को और गांव के लोगों को एकत्र कर के उन्हें प्रधानमंत्री जी का भाषण सुनवा सकूं.”

रेडियो का जुगाड़ करने वाले वे अकेले नहीं हैं.

बिल्हा के एक गांव के शिक्षक अवधेश ने तय किया है कि वे अपने सेलफोन को मांग कर लाए गये स्पीकर से जोड़ेंगे और फिर बच्चों को प्रधानमंत्री का भाषण सुनाएंगे.

लेकिन इतने भर से संकट टलने वाला नहीं है. गांव के आमंत्रित लोगों को और बच्चों को भोजन भी करवाना है. उसके लिये पैसे कहां से आएंगे, यह किसी को नहीं पता. शाम पांच बजने के तुरंत बाद पूरे आयोजन की तस्वीर के साथ उसी शाम प्रतिवेदन शिक्षा अधिकारी को सौंपना है कि कार्यक्रम हो गया.

राज्य के माओवाद प्रभावित इलाकों में दोपहर होते तक स्कूलों में ताले लग जाते हैं. ऐसे में शाम तक रुक कर प्रधानमंत्री के भाषण सुनाने का साहस कितने शिक्षक दिखा पाएंगे, यह देखना भी दिलचस्प होगा.

छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्यों का हाल तो और भी बुरा है. मानव संसाधन मंत्रालय के राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय के 2013 के आंकड़े इस प्रकार हैं-

राज्य                   बिजली की सुविधा वाले स्कूलों का प्रतिशत
बिहार                    4.8
झारखंड                11.1
मध्यप्रदेश            23.1
झारखंड                11.1
मध्यप्रदेश            23.1
ओडिशा               23.9
उत्तरप्रदेश          38.5

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