श्रीलंकाई टीम वापस, उच्चायुक्त होंगे तलब

Monday, August 4, 2014

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सुषमा स्वराज

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: जेएम हरून क्रिकेट टूर्नामेंट में यहां हिस्सा लेने आई श्रीलंका की अंडर-15 टीम को सुरक्षा कारणों से सोमवार को वापस लौटा दिया गया. टूर्नामेंट के आयोजकों ने इसकी जानकारी दी. श्रीलंकाई टीम रविवार को यहां पहुंची थी.

टूर्नामेंट के आयोजक और कांग्रेस नेता जे. एम. हरून ने कहा, “श्रीलंकाई टीम होटल पहुंची लेकिन इसके तत्काल बाद पुलिस द्वारा उन्हें हवाई अड्डे ले जाया गया. पुलिस ने टीम को किसी दूसरे होटल में ठहराने से भी मना किया. श्रीलंकाई लड़को ने रात हवाई अड्डे पर ही गुजारी.”

उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक टीम को इस तरह वापस भेजना पड़ा. यह श्रीलंकाई खिलाड़ी 15 साल से भी कम उम्र के हैं. ऐसे में राजनीति की बात कहां से आती है.”

उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट का यह आठवां संस्करण है. हरून ने कहा, “पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमों ने वीजा समस्या के कारण अपना दौरा रद्द कर दिया है. मलेशिया की टीम यहां पहुंची है. टूर्नामेंट में 12 टीमें हिस्सा ले रही हैं.”

इससे पहले 2012 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने श्रीलंका की दो फुटबाल टीमों को लौटने के आदेश दिए थे जो यहां दोस्ताना मैच खेलने के लिए आए हुए थे. जयललिता ने नेहरू स्टेडियम के अधिकारी को भी चेन्नई कस्टम्स के खिलाफ रॉयल कॉलेज ऑफ कोलम्बो की टीम को यहां खेलने की इजाजत देने के आरोप में निलंबित किया था.

उधर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे.जयललिता पर अपमानजनक लेख के मामले में श्रीलंका के उच्चायुक्त को तलब किया जाएगा. सुषमा ने राज्यसभा में कहा, “सरकार इसकी कड़ी निंदा करती है. हम निश्चित रूप से इस मामले में श्रीलंका के उच्चायुक्त को तलब करेंगे और इसकी शिकायत करेंगे.”

इस मामले में सुषमा को सदन को यह भरोसा तब देना पड़ा, जब इस मुद्दे पर हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हो रही थी. इस मुद्दे पर हंगामे के कारण सदन में प्रश्नकाल नहीं चल पाया.

प्रश्नकाल के दौरान सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी, क्योंकि एआईएडीएमके के सदस्य सभापति के आसन के पास जाकर हंगामा करने लगे.

श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर पिछले सप्ताह जयललिता और मोदी से संबंधित एक आपत्तिजनक लेख प्रकाशित हुआ था, जिसे हालांकि श्रीलंका ने बाद में हटा लिया और इस पर बिना शर्त माफी भी मांग ली.

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