छह वर्षीय बच्चे के नाम समन

Sunday, February 9, 2014

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नाबालिग वरुण

रतनपुर | उस्मान कुरैशी: फरियादी बनकर थाना पहुंचा वृद्व आरोपी बन गया. हद तो तब हो गई जब वृद्ध के छह साल के नाबालिग नाती के नाम से न्यायालय तहसीलदार एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी कोटा से धारा 151,107 ,116 (3) जाफता फौजदारी के तहत जुर्म दर्ज होने संबंधी समंस जारी हो गया. अब तीन माह से बुजुर्ग समंस का सच जानने भटक रहा. मामला कोटा थाना का है.

कोटा नगरपंचायत क्षेत्र के महुआखार पारा निवासी छेदीलाल अपने बेटी के परिवार के साथ रहता है. छेदीलाल कोटा थाना के पास ही गायत्री मंदिर में पुजारी का काम करता है. इनका अपने छोटे बेटे व बहु के साथ पारिवारिक संपत्ति को लेकर विवाद है.

छेदी लाल के मुताबिक उनका छोटा बेटा पारिवारिक संपत्ति से अपना हिस्सा लेकर पोड़ी कवर्धा चला गया था. अब वह लौट कर हमारे हिस्से की संपत्ति पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया है. संपत्ति को लेकर ही बूढे मां बाप को प्रताड़ित करता है. आपसी विवाद होने पर बहु ने सास रूकमणी की जमकर पिटाई कर दी. छेदीलाल पत्नी के रूकमणी साथ बेटा बहु के खिलाफ मामला दर्ज कराने कोटा थाना पहुंचे.

छेदीलाल का आरोप है कि पुलिस ने हमारी शिकायत पर कोई कार्रवाई नही की. फिर एक दिन न्यायालय तहसीलदार एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी कोटा से धारा 151, 107 ,116 (3) जाफता फौजदारी के तहत जुर्म दर्ज होने संबंधी 15 अक्टूबर 2013 को जारी समंस मिला. एक समंस मेरे नाबालिग छह साल के नाती के नाम पर भी जारी हुआ है. जिसमें उसे भी धारा 151 ,107, 116 (3) जाफता फौजदारी का आरोपी बनाया गया . साथ ही उसे 7 नवम्बर 2013 को न्यायालय में प्रस्तुत होने को कहा गया . नाबालिग प्राइमरी स्कूल का छात्र है.

इस मामले में जब छेदीलाल ने एस आई से बात की तो उन्होने उनके खिलाफ किसी कार्रवाई से इंकार किया. छेदीलाल का आरोप है कि थाने के शर्मा मुंसी ने कोरे कागज में हस्ताक्षर करने के लिए दबाव भी बनाया . पुलिस ने पहले दोनों को गवाह बनाए जाने की बात कही समंस आने पर पता चला कि हमे ही आरोपी बना दिया गया है.

छेदी लाल ने तो तहसील न्यायालय में सशर्त जमानत ले ली पर नाबालिग नाती के मामले का सच जानने अब भी भटक रहा है. मामले पर अधिवक्ता आक्रोश त्रिवेदी का कहना है कि दंड प्रकिया संहिता की धारा 151, 107, 116 (3) के तहत किसी व्यस्क के खिलाफ ही ईस्तगाषा पेश हो सकता है. किसी नाबालिग के खिलाफ ऐसा मामला नही बन सकता.

थाना में अगर इन धाराओं के तहत नाबालिग के खिलाफ अपराध दर्ज हुआ है तो गलत है. तहसील न्यायालय से गलती से ऐसी नोटिस जारी हुई है तो ये भी गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है. मामले परं थाना प्रभारी कोटा ने मोबाईल में बाहर होने की बात कहते हुए रजिस्टर देखकर सही जानकारी दे पाने की बात कही.