भाजपा गरम तो शिवसेना नरम

Monday, October 27, 2014

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भाजपा-शिवसेना

मुंबई | एजेंसी: मोदी तथा अमित शाह की रणनीति महाराष्ट्र में काम करती नजर आ रही है. उल्लेखनीय है कि भाजपा ने चुनाव पूर्व, शिवसेना के मुख्यमंत्री पद की चाहत को देखते हुए उससे 25 वर्ष पुराना गठबंधन तोड़ दिया था. हालांकि, इसका प्रभाव केन्द्र में शिवसेना के मंत्री अनंत गीते तक नहीं पहुंचने दिया गया. महाराष्ट्र चुनाव परिणाम आने के भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी परन्तु उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. ऐसे में कयास लगाये जा रहे थे कि भाजपा, सरकार बनाने को लेकर शिवसेना के पास जायेगी परन्तु भाजपा ने कडा रुख बनाये रखा. जिसका परिणाम यह हुआ कि शिवसेना मुख्यमंत्री के पद के स्थान पर महत्वपूर्ण मंत्रालय की मांग करने लगी. उस पर भी भाजपा नहीं पिघली तथा उसने 30 अक्टूबर को अपने विधायक दल की बैठक की सूचना दे दी है.

अब, निर्णय लेने की बारी शिवसेना की थी तथा उसने फिर से अपने मुखपत्र सामना के माध्यम से आपस में जमीं रिश्तों के बर्फ को तोड़ा है तथा इंगित किया है कि शिवसेना, भाजपा के साथ मंत्री परिषद में शामिल हो सकती है. महाराष्ट्र में सरकार गठन से पहले सोमवार को ऐसा प्रतीत हुआ है कि शिव सेना ने भारतीय जनता पार्टी के प्रति अपना रुख नरम कर लिया है. पार्टी ने संकेत दिया है कि भाजपा से मुख्यमंत्री पद का कोई भी उम्मीदवार जो राज्य की एकता, अखंडता तथा विकास के लिए काम करे, उसका समर्थन किया जाएगा.

चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन पर पार्टी ने कहा, “भाजपा की जीत से हमें खुशी है. कोंकण, मराठवाड़ा, उत्तरी महाराष्ट्र तथा अन्य जगहों पर शिवसेना की बड़ी जीत के लिए मतदाताओं को धन्यवाद.”

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में शिवसेना ने भाजपा में चल रही जोड़-तोड़ से खुद को दूर रखते हुए कहा है कि महाराष्ट्र में भाजपा केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की वजह से जीती.

संपादकीय के मुताबिक, “भाजपा में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं, लेकिन इसका फैसला केवल मोदी व शाह करेंगे. जाति तथा क्षेत्रीयता के मुद्दे पर हम महाराष्ट्र का विभाजन नहीं चाहते और नए मुख्यमंत्री को इसे सुनिश्चित करना होगा तथा मराठी गर्व की रक्षा करनी होगी.”

संपादकीय में कहा गया है कि मुंबई तथा महाराष्ट्र में हिंदुत्व के लिए शिवसेना का योगदान बेमिसाल है.

हम समस्त हिंदुओं का समर्थन करते हैं चाहे वे गुजराती, राजस्थानी, मारवाड़ी, जैन, सिंधी या उत्तर भारतीय हों. हमने हमेशा उन्हें स्नेह तथा प्यार दिया है. लेकिन चुनाव में जिस तरह से मतदान हुआ है, स्पष्ट है कि मुद्दों पर जाति तथा क्षेत्रवाद हावी रहा है.

भाजपा में मुख्यमंत्री पद के दो उम्मीदवारों पर टिप्पणी करते हुए लेख में कहा गया है कि भाजपा नेता नितिन गडकरी अनुभवी प्रशासक हैं. उन्होंने केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वाह किया है और विकास के प्रति उनका दृष्टिकोण साफ है. क्या मोदी उन्हें सत्ता सौपेंगे? देवेंद्र फडणवीस को विधायी मामलों की अच्छी जानकारी है, लेकिन उनके पास प्रशासकीय अनुभव नहीं है.

संपादकीय में कहा गया है कि राष्ट्रपति के रूप में हमने प्रतिभा पाटील का समर्थन किया था, लेकिन हमारे भाजपाई मित्र को यह रास नहीं आया. यहां तक कि पंकजा मुंडे मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं. इसके अलावा, विनोद तावड़े, प्रकाश जावड़ेकर जैसे नाम भी हैं. यदि इसका फैसला नई दिल्ली में होगा, तो फिर राज्य के नेताओं द्वारा इसपर चर्चा करने का क्या मतलब?

विरोधियों को चेतावनी देते हुए संपादकीय में कहा गया है कि जो राज्य को आगे ले जाएगा, हम उसका समर्थन करेंगे. कुछ लोग शिवसेना के बारे में बेबुनियाद खबरें फैला रहे हैं. बाघ को उत्तेजित न करें.

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