जल बचेगा तब जन बचेंगे: राजेंद्र सिंह

Sunday, February 15, 2015

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राजेंद्र सिंह- 'पानी वाले बाबा'

भोपाल | एजेंसी: राजेन्द्र सिंह मानना है कि जब जल बचेगा तब जन बचेंगे, लिहाजा जल सुरक्षा के लिए कानून जरूरी है. देश में नदियों की बदहाल होती स्थिति और बढ़ते जल संकट के मदद नजर ‘पानी वाले बाबा’ के नाम से पहचाने जाने वाले मैगसेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह इन दिनों देशव्यापी नदी यात्रा पर है.

जल-जन जोड़ों अभियान के तहत देशव्यापी नदी यात्रा पर गणतंत्र दिवस को कर्नाटक से निकले राजेंद्र सिंह ने बुंदेलखंड प्रवास के दौरान आईएएनएस से कहा कि समान जल अधिकार और सभी को जल सुरक्षा दिलाने के लिए आज जल सुरक्षा कानून जरूरी हो गया है.

सिंह ने केंद्र सरकार को यह कानून बनाने के लिए एक वर्ष का समय दिया है. वह अपनी यात्रा के दौरान पूरे वर्ष 2016 यानी अगले गणतंत्र दिवस तक देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर जल-जन जोड़ो अभियान के तहत लोगों में जागृति लाने के लिए कार्यक्रम व संवाद करेंगे.

सिंह अपनी नदी यात्रा के तहत अब तक कर्नाटक के अलावा महाराष्ट्र हिमाचल और बुंदेलखंड में वातावरण निर्माण के लिए प्रवास कर चुके है. बुंदेलखंड के प्रवास पर आए सिंह ने चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की स्थिति पर चिंता जताई. साथ ही कहा कि इस इलाके का जल संकट किसी से छुपा नहीं है. नदियों को बचाना और उन्हें प्रदूषण मुक्त रखना सभी की जिम्मेदारी है.

सिंह की अगुवाई में देश में जल-जन जोड़ो अभियान चल रहा है. इस संगठन का पारंपरिक जल निकायों, नदी पुर्नजीवन और जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन पर जोर है. राष्ट्रीय स्तर पर जल सुरक्षा और पानी की उपयोगिता को लेकर इस अभियान की शुरुआत अप्रैल 2013 में हुई थी.

बीते दो वर्षो से चली कोशिशों से पानी पर विशेषज्ञता रखने वाली संस्था, पानी के मुद्दों पर कार्य करने वाले सिविल सोसाइटी आर्गनाइजेशन के प्रतिनिधियों, युवा, शिक्षाविद, वैज्ञानिक और अन्य क्षेत्रों के बहुत से लोग इस अभियान के अंग बन चुके हैं.

सिंह का कहना है कि जल-जन जोड़ो अभियान का मुख्य उद्देश्य जल के अधिकार को राष्ट्रीय स्तर पर शामिल किए जाने पर है. उनकी कोशिश है कि इस अभियान में सरकार से लेकर समाज के जिम्मेदार लोग जुड़ें ताकि जल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

इस अभियान से 1200 से अधिक संस्थाएं और अलग-अलग वर्गों के लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं. इस अभियान को सोलह विश्वविद्यालयों से जोड़ा गया है. इसमें आईआईटी मुंबई, बनारस, दिल्ली, लखनऊ, कर्नाटक, निर्मल निकेतन आदि से तकनीकी सहयोग प्राप्त हो रहा है.

वह बताते हैं कि इस अभियान के प्रयासों का ही नतीजा रहा कि वर्ष 2014 के 16वें लोकसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनितिक पार्टियों के घोषणा पत्र में जल के अधिकार के मुद्दे को शामिल किया गया. इस अभियान के समूह ने वर्ष 2014 में जल सुरक्षा विधेयक का एक प्रारूप भी तैयार किया.

उन्होंने कहा कि लोगों को अपने जीवन में गरिमा के साथ आवश्यक मात्रा में गुणवत्तापूर्ण जल की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित करना इस विधेयक का मुख्य प्रावधान है.

सिंह ने बताया कि नदी यात्रा व जल-जन जोड़ो अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में जल संरक्षण व नदी पुर्नजीवन यात्राओं का आयोजन करेगा. जल सुरक्षा अधिनियम पर बैठकों का आयोजन किया जाएगा. युवाओं को आंदोलनों के साथ जोड़ा जाएगा. सांसद, विधायकों व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकों होंगी.

अभियान की आगामी योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर जल सुरक्षा कानून पर साझा बैठक कर राज्यवार जनसुनवाईयों का आयोजन किया जाएगा. जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं वहां के राजनैतिक दलों के घोषणापत्र में जल कानून को सम्मिलिति कराने के के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. श्रमदान एवं सामूहिक प्रयास से तालाबों एवं नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा.

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