रेत से सस्ती इंसान की जान!

Friday, April 10, 2015

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मध्य प्रदेश

भोपाल | एजेंसी: मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में अवैध खनन के कारोबारियों के लिए रेत से सस्ती है इंसान की जान है. यही कारण है कि जो भी उनके वाहन को रोकने की कोशिश करता है, उसे बड़ी कीमत चुकाना पड़ती है. ऐसा यहां हो भी रहा है. इस सच्चाई का खुलासा पुलिस के जवान धर्मेद्र सिंह चौहान को कुचलकर मारने वाले डंपर के मालिक बंटी उर्फ राम लखन गुर्जर ने किया है.

मुरैना के नूराबाद में बीते रविवार को धर्मेद्र को रेत के अवैध खनन में लगे डंपर ने रौंद दिया था. यह घटना तब हुई थी, जब धर्मेद्र ने इस वाहन को रोकने की कोशिश की थी. पुलिस इस हादसे को अंजाम देने वाले चालक तहसीलदार सिंह गुर्जर और डंपर मालिक बंटी उर्फ राम लखन गुर्जर को गिरफ्तार कर चुकी है.

बंटी ने जो पुलिस के सामने खुलासा किया है, वह चौंकाने वाला है. उसके चालक को साफ निर्देश थे कि डंपर किसी भी कीमत पर नहीं पकड़ा जाना चाहिए, इसके लिए उसे चाहे जो करना पड़े.

बंटी के मुताबिक, उसने अवैध खनन का कारोबार वर्ष 2000 में शुरू किया था. आज उसके पास दो डंपर हैं और वह बैंक का कर्ज भी चुकता कर चुका है.

मुरैना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह ने कहा कि इस इलाके में अवैध खनन में लगे लोगों का लक्ष्य यह होता है कि उनका किसी भी कीमत पर वाहन नहीं पकड़ा जाना चाहिए. यहां पुलिस सक्रिय है, वह अपने अभियान में लगी रहती है, मगर वाहन मालिक अपने चालकों को निर्देश दिए रहते हैं कि वाहन किसी भी कीमत पर नहीं पकड़ा जाना चाहिए, इसके लिए उन्हें चाहे जो भी करना पड़े. यानी किसी की जान ही क्यों न लेनी पड़े.

मुरैना वही जिला है जहां अवैध खनन को रोकने की कोशिश में तीन वर्ष पहले भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी नरेंद्र कुमार को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. इसके अलावा भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब अवैध खनन को रोकने में कई अफसरों की जान जाते-जाते बची है. इससे जाहिर है कि यहां अवैध खनन करने वालों के लिए रेत से सस्ती इंसान की जान होती है.

ग्वालियर क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली का कहना है कि इस इलाके में नदी किनारे बसने वाले सैकड़ों गांवों के लोगों के पास रोजगार नहीं है, लिहाजा रेत का खनन ही उनके लिए रोजगार का जरिया है. प्रदेश में रेत खनन की कोई नीति नहीं है, सरकार को अध्ययन कराने के साथ एक नीति बनाना चाहिए. इस नीति से जहां लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा, वहीं सरकार केा मिलने वाला राजस्व भी बढ़ेगा.

सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद मिश्रा बताते हैं कि प्रदेश की नदियों में चल रहे अवैध खनन के कारण जलीय जंतुओं का जीवन खतरे में पड़ गया है.

मिश्रा के अनुसार, भोपाल स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की शाखा ने भी खनन पर चिंता जताई है, साथ ही कहा है कि पुलिस भी अवैध खनन को नहीं रोक पा रही है.

राज्य में जारी खनन माफियाओं के अभियान और बड़े रसूखदारों से उनकी साठगांठ ने पुलिस और प्रशासन की नाकामी का खुलासा कर दिया है, वहीं सुशासन के दावे वाली सरकार खनन माफियाओं पर अंकुश लगाने का दावा भी कर रही है. देखना होगा कि उसके दावे में कितना दम है.

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