जमाखोरों के आगे झुकी मप्र सरकार

Tuesday, October 20, 2015

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मध्य प्रदेश

भोपाल | समाचार डेस्क: मध्य प्रदेश सरकार व्यापारियों के आग्रह के बाद उनके सामने झुक गई है. इससे दाल की जमाखोरी बढ़ने तथा उसके दाम बढ़ने की आशंका है. उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में दाल जमाखोरों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई अचानक तीन दिन के लिए रोक दी गई है. सरकार का कहना है कि व्यापारियों को अपना लेखा-जोखा अद्यतन करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई है. लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने संग्रहण और लेखा-जोखा अद्यतन करने के नाम पर दाल कारोबारियों को सारी गड़बड़ियां दुरुस्त करने का मौका दे दिया है.

दाल की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के मकसद से राज्य में दाल संग्रहण नियंत्रण कानून लागू किए जाने के बाद महज 24 घंटों में हुई कार्रवाई ने व्यापारियों और भाजपा संगठन की नींद उड़ा दी.

भाजपा के व्यापारी प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष गोपी कृष्ण नेमा ने भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नंद कुमार चौहान से इन कार्रवाइयों से व्यापारियों में बढ़े असंतोष से अवगत कराया. इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आनन-फानन में रविवार रात तीन दिन के लिए कार्रवाई स्थगित करने का निर्देश दे दिया.

नेमा ने सोमवार को कहा, “किसी कानून को लागू करने से पहले राज्य के व्यापारियों को समय दिया जाना चाहिए. इस बात से पार्टी और सरकार को अवगत कराया था. उसके बाद मुख्यमंत्री चौहान ने व्यापारियों को अपना रिकार्ड अद्यतन करने के लिए तीन दिन का समय दिया है.”

राज्य सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने रविवार को एक लिखित बयान जारी कर व्यापारियों से अपील की है कि नियंत्रण आदेश के प्रावधानों की सीमा में संग्रहण रखते हुए अपने रिकार्ड और संग्रहण का लेखा अद्यतन आगामी तीन दिन के भीतर कर लें. इसके बाद स्टॉक सीमा से अधिक सीमा में आवश्यक वस्तुओं का स्टॉक रखने एवं रिकार्ड संधारण न करने पर दोषी व्यापारी के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी.

सरकार के इस कदम पर कांग्रेस प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा ने कहा, “सरकार ने भाजपा संगठन और व्यापारियों के दवाब में कार्रवाई तीन दिन के लिए रोकी है, ताकि व्यापारियों को अपने गोदामों में जमा दाल ठिकाने लगाने का मौका मिल जाए. अगर छापे की कार्रवाई जारी रहती तो कई ऐसे कारोबारी बेनकाब हो जाते जो भाजपा को चंदा देते हैं.”

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव बादल सरोज ने कहा, “प्रदेश में जब से भाजपा सरकार आई है, कभी भी कालाबाजारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि भाजपा को मदद कालाबाजारी करने वाले ही करते हैं. एक दिन के छापों में 30 हजार क्विंटल से ज्यादा दाल का मिलना साबित करता है कि दाल की कमी नकली है, और अब उस कार्रवाई को रोक देना बताता है कि सरकार कालाबाजारियों और जमाखोरों की मदद कर रही है.”

उधर मध्य प्रदेश के दाल-चावल व्यापारी महासंघ के महासचिव अनुपम अग्रवाल का कहना है कि “राज्य में अचानक आवश्यक वस्तु अधिनियम के लागू होते ही कार्रवाई शुरू हो गई. यह व्यापारियों के लिए कष्टदायी है. एक दिन में कई स्थानों पर छापे मारे गए हैं, और हजारों क्विंटल दाल जब्त की गई है.”

अग्रवाल ने कहा, “त्योहारों का मौसम है और दालों की मांग अधिक है. लिहाजा कारोबारी दालों का भंडारण किए हुए हैं. अचानक संग्रहण सीमा तय किए जाने से समस्या खड़ी हो गई है. सरकार द्वारा कानून लागू किए जाने के बाद व्यापारियों को समय दिया जाना चाहिए था, तीन दिन की मोहलत देना ठीक है.”

राज्य सरकार के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री विजय शाह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को 16 अक्टूबर को सुझाव दिया था कि दाल के दामों पर नियंत्रण पाने के लिए दाल संग्रहण नियंत्रण कानून लागू किया जाए. मंत्री के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने 17 अक्टूबर को कानून लागू कर दिया. कानून के लागू होते ही कई जिलों में दाल कारोबारियों के गोदामों पर दबिश देकर हजारों क्विंटल दाल जब्त कर ली गई.

उल्लेखनीय है कि राज्य में तुअर, उड़द, मूंग एवं मसूर दलहन एवं दालों के भाव में अप्रत्याशित वृद्घि पर नियंत्रण के लिए 17 अक्टूबर को ‘मध्यप्रदेश आवश्यक वस्तु व्यापार (स्टॉक सीमा तथा जमाखोरी पर निर्बन्धन) आदेश 2015′ जारी किया गया है. आदेश में सभी प्रकार की दालों के थोक और फुटकर व्यापारियों के लिए संग्रहण सीमा तय की गई है.

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