व्यापमं घोटाला: अब इस्तीफे की मांग

Thursday, July 9, 2015

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व्यापमं

भोपाल | समाचार डेस्क: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल के इस्तीफे की मांग ने जोर पकड़ लिया है. गुरुवार को सर्वोच्य न्यायालय द्वारा व्यापमं की जांच सीबीआई से करवाने के निर्णय के बाद इस इस्तीफे की मांग बढ़ गई है. कांग्रेस जहां इसे अपने जीत के रूप में प्रचारित कर रही है वहीं, भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री ने ही सीबीआई जांच की मांग की है. बहरहाल, मध्य प्रदेश के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति के मंच पर व्यापमं एक ज्वलंत मुद्दा बन गया है. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल, व्यापमं घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो, सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल रामनरेश यादव के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी है. कांग्रेस ने फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस्तीफा मांगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने व्यापमं घोटाले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी है, वहीं राज्यपाल यादव की भर्ती में संलिप्तता के बाद प्राथमिकी दर्ज किए जाने के मामले में नोटिस जारी किया गया है.

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने संवाददाताओं से गुरुवार को कहा, “सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागतयोग्य है, मगर मामला सीबीआई तक पहुंचने में काफी देरी हो गई है.” यादव का कहना है कि व्यापमं घोटाले, उससे जुड़े लोगों की हुई मौतों की जांच सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई से कराने के आदेश दिए हैं, इसमें अब तक व्यापमं की जांच कर रही एजेंसियों को भी शामिल किया जाना चाहिए.

यादव ने कहा, “राज्य के मुख्यमंत्री चौहान लगातार जनमत के सम्मान की बात कहते रहे हैं, लिहाजा उन्हें जनमत का सम्मान करते हुए अब अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. कांग्रेस का पूर्व घोषित 16 जुलाई को राज्य बंद का ऐलान यथावत रहेगा.”

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए कदम के बाद कहा, “राज्यपाल यादव और मुख्यमंत्री चौहान को इसके बाद एक मिनट भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है.” उन्होंने कहा कि इन दोनों व्यक्तियों को पद की गरिमा और विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए पद से हट जाना चाहिए. अब यह जरूरी है कि मुख्यमंत्री सबसे पहले अपने पद से हटे ताकि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी दबाव के हो सके.

सीपीएम के प्रदेश सचिव बादल सरोज का कहना है, “सर्वोच्च न्यायालय ने व्यापमं और उससे जुड़ी मौतों पर सीबीआई जांच का आदेश देकर एकदम उचित हस्तक्षेप किया है. इससे इंसाफ की थोड़ी बहुत उम्मीद जगी है, हालांकि इस बीच जैसा कि नम्रता डामोर और डा. साकल्ले के बारे में उजागर हुए तथ्यों से सामने आया है, एसटीएफ , एसआईटी और शिवराज सरकार काफी अधिक सबूत मिटा चुकी है इसलिए अब मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों को इस्तीफा दे देना चाहिए.”

जनता दल यूनाइटेड के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद यादव ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस मामले में मुख्यमंत्री निवास और राजभवन सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. नैतिकता के आधार पर दोनों को इस्तीफा देना चाहिए. यह जांच निष्पक्ष हो इसके लिए दोनों इस्तीफा दें.

उल्लेखनीय है कि राज्य में व्यावसायिक परीक्षा मंडल वह संस्था है जो इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडीकल कॉलेज में दाखिले से लेकर वे सारी भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है, जो मप्र लोक सेवा आयोग आयोजित नहीं करता है. मसलन पुलिस सब इंस्पेक्टर, आरक्षक, रेंजर, शिक्षक आदि. इन दाखिलों और भर्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद जुलाई 2013 में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. इस मामले में अब तक 21 सौ गिरफ्तारियां और 49 लोगों की मौत हो चुकी है.

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