संसद में उठेगा छत्तीसगढ़ नसबंदी कांड

Monday, November 24, 2014

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संसद भवन

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: सोमवार से शुरु हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में छत्तीसगढ़ में नसबंदी के बाद महिलाओं के मरने का मुद्दा छाया रहेगा. इसके लिये छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने रविवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाजपा के लोकसभा तथा राज्यसभा सदस्यों के साथ बैठक की. रायपुर में हुई छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों की बैठक में लोकसभा सांसद रमेश बैस, चंदूलाल साहू, दिनेश कश्यप, कमलभान सिंह, लखनलाल साहू, अभिषेक सिंह, डॉ. बंशीलाल महतो, तथा राज्य सभा सांसद रणविजय प्रताप सिंह जूदेव और डॉ. भूषणलाल जांगड़े ने भाग लिया.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 8 नवंबर को बिलासपुर के पेंडारी तथा पेंड्रा में हुए नसबंदी के बाद महिलाओं सहित 18 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, शनिवार को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री अमर सिंह ने माना कि नसबंदी के दी गई दवा सिप्रोसीन में जहर मिला हुआ था. जाहिर है कि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरेगी.

इसलिये छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों की बैठक में जानकारी दी गई तथा अधिकारियों ने बताया कि इस महीने की 8 तारीख को ग्राम पेंडरी और 10 तारीख को गौरेला, पेण्ड्रा तथा मरवाही में आयोजित नसबंदी शिविरों में ऑपरेशन के बाद कई महिलाएं बीमार हो गई थी, जिन्हें तत्काल बिलासपुर ला कर तीन विभिन्न अस्पतालों-शासकीय जिला अस्पताल, सिम्स और अपोलो में भर्ती कराया गया. कुल 121 में से अब तक 104 महिलाओं को स्वस्थ होने पर अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है.

सांसदों को बताया गया कि रविवार 22 नवम्बर की स्थिति में 17 महिलाओं का इलाज चल रहा है. शिविरों में गंभीर लापरवाही बरतने पर स्वास्थ्य विभाग के 4 अधिकारियों को निलंबित कर उनमें से दो अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है. एफआईआर दर्ज कर उनमें से एक बर्खास्त डॉक्टर को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. दवाईयों में विषैला पदार्थ मिलने पर संबंधित दवा निर्माता कंपनी की सभी दवाईयों को प्रतिबंधित कर कंपनी के मालिक और उसके पुत्र को गिरफ्तार भी किया गया है. उन पर न्यायालय में मुकदमा चलाया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दवा कंपनी के खिलाफ उठाये कदम के बारे में बताया गया कि इस कंपनी को गलत प्रमाण पत्र जारी करने पर एक सहायक औषधि निरीक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है. नसबंदी में मृत महिलाओं के परिवारों को चार-चार लाख रूपये और बीमार महिलाओं को 50-50 हजार रूपए की सहायता दी गई है. मृत महिलाओं के नाबालिक बच्चों को राज्य सरकार ने गोद लिया है और उनके तथा कलेक्टर के नाम से प्रत्येक बच्चे के लिए दो लाख रूपये की एफडी की गई है. इन बच्चों के 18 वर्ष के होने तक उनकी शिक्षा की पूरी व्यवस्था भी राज्य शासन द्वारा की जाएगी.

वहीं, बीमार महिलाओं को अस्पतालों से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें अपोलो अस्पताल का निःशुल्क हेल्थ कार्ड दिया गया है जिसमें उन्हें तीन वर्ष तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी. उन्हें बताया गया कि सम्पूर्ण मामले की न्यायिक जांच के लिए एकल सदस्यीय आयोग भी गठित कर दिया गया है. आयोग की रिपोर्ट आने पर इसमें जो भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा, उसके खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

उधर कांग्रेस भी इस नसबंदी के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की पूरी तैयारी में है. विपक्ष नसबंदी के अलावा भी काले धन के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करेगा. यही नहीं, तृणमूल कांग्रेस, सपा, वामपंथी दल, बसपा, जदयू और राजद ने कांग्रेस से सरकार को घेरने में एकजुट होने को कहा है.

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