स्वर कोकिला लता के नाम पर बनाया मंदिर

Saturday, September 28, 2013

A A

लता मंगेशकर

इंदौर | एजेंसी: दीवानगी को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता और न ही उसका जानने का कोई पैमाना होता है. इसका प्रमाण है मध्य प्रदेश के इंदौर में स्वर कोकिला लता मंगेशकर की दीवानी वर्षा झालानी का घर, जो मंदिर में बदल चुका है. उन्होंने तो अपने घर का नाम ही लताश्रय रख दिया है.

लता की दीवानी वर्षा झालानी इंदौर के ओल्ड पलासिया क्षेत्र के सकेत नगर में रहती हैं. वर्षा का घर बाहर से तो आम मकानों जैसा ही है, मगर अंदर का नजारा अचरज पैदा कर देने वाला होता है, क्योंकि दरवाजे से लेकर हर तरफ सिर्फ एक ही तस्वीर नजर आती है और वह है लता मंगेशकर की. लता के जीवन से जु़ड़ी शायद ही कोई फोटो हो जो इस मकान में न सजी हो और न ही मकान का कोई ऐसा कोना है जहां लता न नजर आएं.

वर्षा का जीवन ही लता के इर्द गिर्द घूमता है. दिन की शुरुआत लता के गीत से होती है तो रात भी. सुबह और शाम उनकी आरती उतरती है. उसका कहना है कि लता ताई के रूप में इस धरती पर साक्षात मां सरस्वती ने जन्म लिया है.

लता के प्रति वर्षा में यह दीवानगी अचानक नहीं जगी है, बल्कि वह कहती हैं कि लता के प्रति उसकी यह दीवानगी जन्मजात है. उसकी मां भी लता की दीवानी थीं. जब वह गर्भ में थी तो मां भगवान से सिर्फ यही प्रार्थना करती थी कि उसके घर में बेटी पैदा हो और वह बड़ी होकर लता की तरह ही अपनी आवाज का जादू बिखेरे.

वह बताती है कि मां उन दिनों सिर्फ लता ताई के ही गाने सुना करती थीं. जब वह छोटी थी तो मां रेडियो में बजने वाले लता के गाने उसे भी सुनाती थी. जैसे-जैसे बड़ी होती गई लता ताई के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहने लगी, जिन दिनों बच्चे खिलौनों की मांग किया करते थे, वर्षा लता के गानों के कैसेट मांगती थी.

वर्षा को जेब खर्च के लिए जो पैसे मिलते थे, उसमें से बचत कर वह लता के कैसेट खरीद लाती थी. वह बताती है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई, वैसे-वैसे लता के प्रति उसका समर्पण बढ़ता गया, आज उसके लिए यदि कोई भगवान है और वह पूजा करती है तो सिर्फ लता की. घर में उनका मन्दिर भी है. इसी मन्दिर के सामने बैठकर वह घंटों लता के गाए गानों का रियाज करती है.

पूरा देश शनिवार 28 सितंबर को लता मंगेशकर का जन्मदिन मना रहा है और वर्षा भी अपने देवता को अपने तरह से याद कर रही है. वर्षा के लिए आज सबसे खुशी का दिन है.

वर्षा बताती है कि उसने संगीत की शिक्षा तो ली है, लेकिन उसका कोई गुरु नहीं है. वह सिर्फ लता को ही अपना गुरु मानती है. वर्षा की लता से मुलाकात हो चुकी है और लता ने उसे आशीर्वाद भी दिया था कि वह खूब तरक्की करे, साथ ही रियाज का सिलसिला भी जारी रखे.

वर्षा लता के गाए गानों को एक नहीं बल्कि बारह भाषाओं में गा सकती है. टीवी चैनल के एक रियलिटी शो से लता के गाने गाकर अपनी पहचान बनाने वाली वर्षा अपने देवता की दीर्घायु की कामना करती है.

Tags: ,