छत्तीसगढ़ का ‘यमराज’ ओडिशा में

Wednesday, November 19, 2014

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'सिप्रोसीन कांड'

भुवनेश्वर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में मौत का कारण बनने वाला ‘सिप्रोसीन’ ओडिशा में घड़ल्ले से बिक रहा है. ओडिशा सरकार , डॉक्टर तथा जनता को भी इसके बारें में ज्यादा जानकारी नहीं है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के महावर फार्मा के द्वारा निर्मित सिप्रोसीन 500 मिलीग्राम के टेबलेट से 16 जाने जा चुकी है. सूत्रो से मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ पुलिस ने जब महावर फार्मा के कर्मचारियों से सोमवार को पूछताछ कि तो उन्होंने स्वीकार किया कि इस दवा को ओडिशा में भी भेजा गया है.

ओडिशा की स्वास्थ्य विभाग की सचिव आरती आहूजा ने समाचार पत्रों के हवाले से बताया कि ओडिशा सरकार ने सिप्रोसीन 500 मिलीग्राम के दवा को नहीं खरीदा है. उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि बाजार में इस दवा की कितनी मात्रा उपलब्ध है. ओडिसा के ड्रग कंट्रोलर से कहा गया है कि इसकी जांच करें.

गौरतलब है कि महावर फार्मा द्वारा अपनी दवा सिप्रोसीन 500 की 10 गोलियों को 12 रुपये से लेकर 30 रुपये तक में बेचा जाता है जबकि इसे मरीजों को 60 रुपये में बेचा जाता है. जाहिर है कि इतने अधिक मुनाफे के कारण यह दवा ओडिशा में भी धड़ल्ले से बिक रहा है. खबरों के अनुसार यदि ओडिशा के डॉक्टर दवा के जेनेरिक नाम सिप्रोफ्लासासिन भी लिखते हैं तो सिप्रोसीन दिया जा रहा है.

ओडिशा में ‘संवाद’ द्वारा किये गये एक सर्वे से उजागार हुआ कि ओडिशा के डॉक्टर तथा दवा दुकानदारों को सिप्रोसीन से छत्तीसगढ़ में हुई मौतें के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पेंडारी में नसबंदी के बाद सिप्रोसीन दवा दी गई थी. जिसके बाद 16 लोगों की मौते हो चुकी हैं. छत्तीसगढ़ सरकार ने इसदवा को राज्य में प्रतिबंधित कर दिया तथा इसके स्टाक को जब्त कर लिया है. छत्तीसगढ़ ने सिप्रोसीन 500 मिलीग्राम की दवा को कोलकाता के लैब में जांच करने के लिये भेजा गया है.

उल्लेखनीय है कि महावर फार्मा के परिसर में छापे के दौरान वहां चूहा मारने की दवा जिंक फास्फाइट मिली थी.

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