देश ने एक ‘सितारा’ खो दिया

Tuesday, November 25, 2014

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सितारा देवी

नई दिल्ली | एजेंसी: मेरे लिए सितारा देवी एक ऐसी महिला थीं, जिन्होंने कथक की दुनिया में अपना मुकाम बनाने के लिए तमाम तकलीफों का डटकर सामना किया. वह अपने नाम की तरह ही एक सितारे के रूप में चमकीं और अपने भाई-बहनों व उस वक्त के लोगों के बीच सबसे ज्यादा चमक बिखेरी.

मैं विख्यात कथक नृत्यांगना सितारा देवी को तब से जानता हूं, जब वह मेरे पिता अच्छन महाराज और चाचा लच्छू व शंभू महाराज से कथक सीख रही थीं. उन्होंने हमेशा गुरु-शिष्य परंपरा की इज्जत की.

वह हालांकि मुझसे बड़ी थीं, लेकिन मेरे साथ हमेशा इज्जत और प्रेम से पेश आईं. हम दोनों के बीच जबर्दस्त सौहार्द और समझदारी थी, जिसने दशकों लंबे गर्मजोशी भरे रिश्ते का रूप ले लिया.

मुझे आज भी याद है कि वह कैसे दिल्ली में हमेशा हमारे तीज-त्योहारों में शामिल हुआ करती थीं. पिछली बार वह यहां एक वॉकर पर आई थीं, लेकिन उन्होंने एक पल के लिए भी यह जाहिर नहीं होने दिया कि वह दुखी, नाखुश या कमजोर हैं. वह हमेशा जिंदादिल शख्स के रूप में सामने आईं.

उनके निधन से कथक जगत में एक बहुत बड़ा खालीपन आ गया है, जिसे कुछ ही लोग भर सकते हैं. उन्होंने अपना पूरा जीवन अपने पेशे को समर्पित कर दिया था.

यह कहना गलत नहीं होगा कि वह इस क्षेत्र में शौहरत कमाने के लिए ही पैदा हुई थीं. उनकी दो बहनें भी नृत्यांगनाएं थीं, लेकिन उन्हें कभी इतनी लोकप्रियता नहीं मिली. सितारा ने समाज के उसूलों को उस समय चुनौती दी, जब नृत्य को महिलाओं के लिए एक सम्मानजनक पेशा नहीं माना जाता था. वह उस पथ पर आगे बढ़ीं, जिस पर उन्हें पूरा यकीन था.

मैं तो यही कहूंगा कि भारत ने आज एक ‘सितारा’ खो दिया है. वह सितारा कथक जगत में सदा एक प्रतिष्ठित शख्सियत बना रहेगा.

(नृत्यांगना सितारा देवी के निधन पर कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज ने मंगलवार को मुंबई में हुई बातचीत के आधार पर.)

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