कश्मीरी वाजवान का लुत्फ उठाये

Monday, October 14, 2013

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ईंद मुबारक

श्रीनगर | एजेंसी:इस ईंद उठाये कश्मीरी व्यंजन वाजवान का लुफ्त. दुनिया भर के स्वादिष्ट व्यंजनों में से एक मशहूर शाकाहारी कश्मीरी वाजवान का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है. किन्हीं का मानना है कि वाजवान ईरान से कश्मीर आया था, वहीं कुछ कहते हैं कि यह कश्मीर का ही प्राचीन मूल व्यंजन है और संभव है वाजा नाम से बुलाए जाने वाले स्थानीय रसोइयों ने मूल व्यंजन की विधि में नए-नए प्रयोग किए होंगे.

पुरखों के समय से वाजवान रसोइयों के रूप में पहचाने जाने वाले पारंपरिक रसोइयों में से एक बशीर अहमद ने बताया, “सबसे उम्दा वाजवान बनाने वाले रसोइये श्रीनगर के पुराने शहर के बाशिंदे हैं. श्रीनगर के पुराने शहर वाजापोरा में पुराने समय में वाजवान रसोइयों के कई परिवार थे.”

उन्होंने आगे कहा, “अब जमाना बदल रहा है. वाजवान रसोइयों के प्रतिष्ठित खानदानों में से अब चार ही परिवार बचे हैं, जो अब भी अपने पारंपरिक पेशे का कुशलता से वहन कर रहे हैं. बाकी खानदानों की पीढ़ियां बाहर चली गईं, कुछ ने दूसरे पेशे अपना लिए.”

अहमद ने कहा कि अब तो कश्मीर में लगभग सभी जगह घरों में वाजवान पकाया जाने लगा है, फिर भी शादियों और दावतों में वाजवान पकाने के लिए वाजा रसोइये को खास तौर से बुलाया जाता है.

वाजवान बनाने की विधि भी इसके इतिहास की तरह ही काफी दिलचस्प है. यह व्यंजन एक विशेष प्रकार के बर्तन में फलों के पुराने वृक्षों की लकड़ी की आग में पकाया जाता है. वाजवान को कई तरह से पकाया जा सकता है. चिकन वाजवान, मटन वाजवान, मशरूम वाजवान, वेजिटिबल वाजवान जैसे डेढ़ दर्जन व्यंजन अकेले वाजवान से बनाए जा सकते हैं.

ईद-उल-अजहा के पास होने को देखते हुए कश्मीर में बहुत से परिवारों ने अभी से ही वाजा रसोइयों को वाजवान के लिए आर्डर देने शुरू कर दिए हैं. वाजवान रसोइये अपने घर पर ही व्यंजन तैयार करने के बाद उसे ग्राहकों के घर पहुंचाते हैं.

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