मध्यप्रदेश मनरेगा में गड़बड़ी: कैग

Sunday, January 12, 2014

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कैग छत्तीसगढ़

भोपाल | समाचार डेस्क: कैग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में मनरेगा के तहत हर जिले में 13 से 20 लाख तक अपात्र हितग्राहियों का पंजीकरण किया गया है.ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवारों को उनके ही गांव में रोजगार मुहैया कराने के लिए अमल में लाई गई केंद्र सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मध्य प्रदेश में बड़े पैमान पर गड़बड़ियां हुई हैं. यह खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट से हुआ है.

राज्य सरकार ने शनिवार को विधानसभा के पटल पर सीएजी के 31 मार्च 2012 को खत्म हुए वित्तवर्ष का प्रतिवेदन रखा, जिसमें मनरेगा में हुई गड़बड़ियों का खुलासा किया गया है. प्रतिवेदन में कहा गया है कि राज्य सरकार के एक आदेश में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हर परिवार का पंजीकरण मनरेगा के तहत करने के निर्देश दिए गए थे.

प्रतिवेदन में आगे कहा गया है कि राज्य सरकार के इस आदेश के चलते राज्य के हर जिले में 13.35 लाख से 19.74 लाख अपात्र परिवारों का योजना के अंतर्गत पंजीकरण किया गया है. एक तरफ जहां अपात्रों का पंजीकरण हुआ है, वहीं वार्षिक विकास योजना तैयार करने में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है. श्रम बजट वास्तविकता के आधार पर तैयार नहीं किया गया है. इतना ही नहीं, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदनों को तैयार करने में अनावश्यक व्यय किया गया है.

सीएजी रिपोर्ट राज्य में लोगों को योजना के मुताबिक काम न मिलने का भी खुलासा करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में मात्र 2.31 प्रतिशत से 12.60 प्रतिशत पंजीकृत परिवार ही ऐसे हैं, जिनके द्वारा 100 दिवस का गारंटीशुदा रोजगार पूरा किया जा सका है.

मनरेगा के जरिए रोजगार हासिल करने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग परिवारों की कम होती संख्या का खुलासा भी इस रिपोर्ट में किया गया है. सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2007-12 की अवधि के दौरान राज्य में अनुसूचित जनजाति परिवारों के मनरेगा के तहत उपलब्ध कराए गए रोजगार का प्रतिशत 49 से घटकर 27 प्रतिशत हो गया है.

मनरेगा में स्वीकृत राशि से भी ज्यादा की राशि का व्यय किए जाने का खुलासा भी इस रिपोर्ट से होता है. रिपोर्ट में मुताबिक, वर्ष 2007-12 की अवधि में भारत सरकार द्वारा योजना के लिए 15 हजार 946.54 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, मगर खर्च हो गए 17 हजार 193.12 करोड़ रुपये.

रिपोर्ट में राज्य में निर्धारित समयावधि में राज्य में रोजगार गारंटी परिषद गठित किए जाने का जिक्र करते हुए कहा गया है कि परिषद का गठन तो समयावधि में हुआ, मगर उसकी बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित नहीं की गई हैं. इतना ही नहीं, राज्य, ब्लॉक तथा ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार गारंटी निधि की स्थापना भी नहीं की गई है.

सीएजी की रिपोर्ट राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण परिवारों के लिए किए जा रहे विकास कार्य व उनके कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदमों के दावों के ठीक उलट है. अब देखना होगा कि राज्य सरकार इससे क्या सीख लेती है.

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