समलैंगिकता: फैसले से सोनिया निराश

Thursday, December 12, 2013

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सोनिया गांधी- कांग्रेस अध्यक्ष

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को कहा कि समलैंगिक अधिकारों पर न्यायालय के फैसले से वह निराश हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने उम्मीद प्रकट की, कि संसद उन नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को बरकरार रखेगी जो बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे. सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसले में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध करार दिया है.

गांधी ने एक बयान में कहा, “मुझे निराशा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक अधिकारों पर दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बदल दिया है. मुझे उम्मीद है कि संसद इस मुद्दे से निपटेगी और इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होने वाले लोगों के जीवन और स्वतंत्रता को कायम रखेगी. हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है हमेशा से समग्र और सहिष्णु रही है. ”

समलैंगिक अधिकारों के कार्यकर्ता सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का विरोध कर रहे हैं. समलैंगिक यौन संबंधों पर भारत के निर्णय का अमरीका ने भी किया विरोध.

भारत में समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध ठहराने को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले पर चिंता जताते हुए अमरीका ने वयस्कों के बीच आम सहमति से समलैंगिक यौन आचरण को अपराध ठहराने का विरोध किया है.

अमरीका के विदेश विभाग की प्रवक्ता जेन पास्की ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, “अमरीका सभी लोगों के मानवाधिकारों और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को बहुत महत्व देता है जिसमें दुनियाभर के समलैंगिक, उभयलिंगी और ट्रांसजेडर व्यक्ति भी शामिल हैं.”

पास्की ने, “हम वयस्कों के बीच आम सहमति से समलैंगिक यौन संबंध बनाने को अपराध कहने वाले किसी भी गतिविधि का विरोध करते हैं.”

उन्होंने कहा, “एलजीबीटी अधिकार, मानवाधिकार हैं. हम विश्व की सभी सरकारों एलजीबीटी व्यक्तियों के लिए समानता की बात कहते हैं.”

यह पूछने पर कि क्या अमरीका ने इस मुद्दे पर भारत को अपने विचार बताए हैं, उन्होंने बताया, “हम इन मुद्दों और अन्य मुद्दों को लेकर भारत के साथ नियमित रूप से संपर्क में हैं.”

प्रवक्ता ने कहा कि अमरीका भारत से यह कानून निरस्त करने को प्रोत्साहित करेगा.

अमरीका के एक शीर्ष एलजीबीटी संगठन ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को ‘भारत और दुनिया के लिए दुखद दिन ‘ कहा है.

संचार निदेशक जॉय मिराबेला ने कहा, “लोग क्या हैं, किससे प्यार करते हैं इसके लिए किसी को जेल नहीं जाना चाहिए. हम भारत के मानवाधिकार के साथ एकजुट होकर खड़े हैं.”

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